इस वक्त की बड़ी खबर छत्तीसगढ़ से सामने आ रही है। यहां बस्तर डिवीजन में 51 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। पुलिस ने इसकी जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक इन सभी नक्सलियों पर कुल 1.61 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। बता दें कि यह आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में 'बस्तर पंडम 2026' उत्सव का उद्घाटन किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 34 महिलाएं शामिल हैं।
'पूना मारगेम पुनर्वास पहल' के तहत किया सरेंडर
बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि बस्तर पुलिस की 'पूना मारगेम पुनर्वास पहल' के तहत बीजापुर जिले में 20 महिलाओं समेत 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है जबकि पड़ोसी सुकमा जिले में 14 महिलाओं समेत 21 अन्य नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि उग्रवादियों ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर यह कदम उठाया है।
गरियाबंद में गोला-बारूद बरामद
वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में भी भारी मात्रा में नक्सलियों के हथियार बरामद किए गए हैं। यहां के पहाड़ी इलाकों में छह स्थानों से सुरक्षाबलों ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ओडिशा से सटे मैनपुर थानाक्षेत्र में भालुदिग्गी और मेटल पहाड़ियों में सुरक्षाबलों ने शनिवार तक 36 घंटे का अभियान चलाया जिस दौरान माओवादियों के इन हथियारों के भंडार का पता चला।
ओडिशा सीमा पर छिपाकर रखा था हथिायार
पुलिस ने कहा कि इस माह के शुरू में सरेंडर कर चुके माओवादियों ने सूचना दी थी कि छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से सटी इन पहाड़ियों पर विभिन्न स्थानों पर प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की ओडिशा प्रदेश समिति के शीर्ष नेतृत्व ने स्वचालित हथियार एवं आयुध निर्माण उपकरण छिपा रखे हैं जिसके बाद जिला पुलिस बल की विशेष ई-30 इकाई ने शुक्रवार को अभियान शुरू किया।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
अधिकारी ने बताया कि जब्त की गई वस्तुओं में दो इंसास राइफलें, एक .303 राइफल, एक देसी पिस्तौल, एक 'सुरका' (देसी बैरल ग्रेनेड लॉन्चर), 12-बोर की दो बंदूक, दो 'सिंगल-शॉट' हथियार, 127 कारतूस, आठ मैगज़ीन, 22 बीजीएल गोले, बिजली के तार का एक बंडल और माओवादियों की तकनीकी टीम की हथियार कार्यशाला में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न उपकरण शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आयुध कार्यशाला का संचालन भाकपा (माओवादी) केंद्रीय समिति के तीन सदस्यों की देखरेख में किया जा रहा था, जो पिछले साल अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे।
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