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बीजापुर: कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में सुरक्षा बलों ने नया शिविर बनाया, कभी नक्सलियों का गढ़ था यह इलाका

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Nov 23, 2025 11:46 pm IST,  Updated : Nov 23, 2025 11:46 pm IST

कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में जंगल बेहद घने हैं। यहां नक्सल विरोध ऑपरेशन के दौरान भी सुरक्षाकर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। शिविर बनाने में भी यहां कई तरह की परेशानियां आईं।

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बीजापुर में सुरक्षाबलों का कैंप Image Source : X/@DISTRICTBIJAPUR

छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर कर्रेगुट्टा पहाड़ियों के घने जंगलों में नक्सल रोधी व्यापक अभियान चलाने के करीब छह महीने बाद सुरक्षा बलों ने एक नया शिविर स्थापित किया है। यह इलाका पहले दुर्दांत माओवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि सुरक्षा बलों ने चार नवंबर को बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्र के ताड़पाला गांव के पास सुरक्षा एवं जन सुविधा शिविर स्थापित किया। इस साल अप्रैल-मई में, केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों ने कर्रेगुट्टा पहाड़ियों के आसपास के घने जंगलों में 21 दिनों का व्यापक अभियान चलाया, जिस दौरान उन्होंने 31 नक्सलियों का सफाया कर दिया।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने 35 हथियार, 450 आईईडी और बड़ी संख्या में डेटोनेटर तथा अन्य विस्फोटक सामग्री जब्त की। अधिकारी ने बताया कि नया शिविर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 196वीं और 205वीं बटालियन तथा कोबरा (सीआरपीएफ की विशिष्ट इकाई, कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) के लिए क्रमशः अग्रिम परिचालन बेस (एफओबी) के रूप में काम करेगा।

नए शिविर की अहमियत

पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह शिविर सीमावर्ती क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और परिचालन क्षमताओं में सुधार करने में मदद करेगा, तथा क्षेत्र में ग्रामीणों के लिए सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल, पीडीएस (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) केंद्र, मोबाइल कनेक्टिविटी और आंगनवाड़ी केंद्र जैसी आवश्यक सेवाओं को सुविधाजनक बनाने में भी मदद करेगा। इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय सीमा क्षेत्र में शिविर स्थापित करने की योजना के तहत, जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), विशेष कार्य बल (एसटीएफ), राज्य पुलिस की दोनों इकाइयां, कोबरा की 205वीं और 210वीं बटालियन और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 196वीं बटालियन की संयुक्त टीम तीन नवंबर को ताड़पाला पहुंचीं।

कैसे हुई शिविर की स्थापना

अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने शिविर की स्थापना करते समय खड़ी चढ़ाई वाले दुर्गम क्षेत्र, सड़कों की गैरमौजूदगी, आईईडी और घात लगाकर हमले के निरंतर खतरे तथा पानी की भारी कमी के बावजूद असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान हेलीकॉप्टर सहायता उपलब्ध कराई गई तथा वरिष्ठ अधिकारी टीम की निगरानी और मार्गदर्शन के लिए समय-समय पर उस स्थाल पर जाते रहे। उन्होंने बताया कि इस स्थान को जंगल युद्ध, रणनीति और अन्य व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा।

14 आईईडी बरामद

ताड़पाला से छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर संयुक्त और समन्वित अभियान चलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 11 नवंबर को राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिविर का दौरा किया, कर्मियों से बातचीत की और कठिन परिस्थितियों में सफलतापूर्वक कार्य पूरा करने के लिए उन्हें बधाई दी। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों के प्रति एकजुटता और समर्थन का मजबूत संदेश देने के लिए सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कोबरा और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 20 और 21 नवंबर को शिविर का दौरा किया और रात भर वहां रुके। उन्होंने बताया कि इलाके में शिविर की स्थापना के बाद से बम निरोधक टीम द्वारा 14 आईईडी बरामद और सुरक्षित रूप से निष्क्रिय किए गए हैं।

बीजापुर में 2024 से 22 सुरक्षा शिविर बने

बीजापुर में 2024 से कम से कम 22 सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान जिले में अलग-अलग मुठभेड़ों में 202 माओवादी मारे गए, 749 ने आत्मसमर्पण किया और 1,006 को गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा शिविरों के आसपास स्थित गांवों में विकास कार्यों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत, सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति, जल सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवा विस्तार, स्कूल और आंगनवाड़ी स्थापना और मोबाइल नेटवर्क सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। (इनपुट- पीटीआई भाषा)

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