दक्षिण प्रशांत महासागर में वानुआतू (Vanuatu) नाम का एक देश स्थित है जहां 80 से ज्यादा द्वीप हैं। उसी देश के Tanna Island पर इस अनोखी आस्था का जन्म हुआ जिसे दुनिया John Frum cargo cult के नाम से जानती है। दरअसल इस आस्था का जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ जब वहां पर अमेरिकी सेना उतरी थी। आइए अब आपको यह बताते हैं कि किस वजह से Tanna Island पर रहने वाले लोगों ने अमेरिकी सेना को अपना मसीहा मान लिया।
अमेरिकी सिपाही को मसीहा क्यों मानते हैं वहां के लोग?
आपको बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब अमेरिकी सेना उस द्वीप पर उतरी तो वहां के स्थानीय लोगों ने पहली बार कुछ ऐसी चीजें देखी जिसके बारे में उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था। उस द्वीप पर मौजूद लोगों ने पहली कार्गो देखा और उस कार्गो के अंदर चॉकलेट भी देखा। इसके साथ ही साथी उन लोगों ने Coca Cola और कपड़े देखें और इसके साथ ही साथ कई दूसरी मॉर्डन चीजें भी देखी जो उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। उन लोगों के लिए वो सिर्फ सामान नहीं बल्कि एक ऐसे जीवन की झलक थी जिसका उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। इसी कारण उस द्वीप पर मौजूद लोगों ने सेना के लोगों को अपना मसीहा समझा।
युद्ध खत्म होने के बाद क्या हुआ?
बता दें कि जब युद्ध खत्म हुआ तो सेना चली गई और सेना के जाते ही उस समुदाय को लगा कि उनके भगवान रूठ गए हैं। ऐसा कहा जाता है कि John Frum नाम दरअसल John from America से आया जब सैनिक अपना परिचय 'John from' कहकर देते थे और धीरे-धीरे यही नाम एक मसीहा का प्रतीक बन गया।
John Frum के लौटने का इंतज़ार करते हैं
आपको बता दें कि उस द्वीप पर मौजूद समुदाय के लोग अमेरिकी सेना जिन्हें वो भगवान मानते थे, उन्हें वापस बुलाने के लिए लोगों ने घास और बांस के हवाई जहाज बनाए, लकड़ी के रेडियो तैयार किए और सैनिकों की तरह मार्च करना शुरू कर दिया। आपको बता दें कि आज भी हर साल 15 फरवरी को ये लोग उत्सव मनाते हैं। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन आसमान से फिर वही Cargo लौटेगा। वे John Frum के लौटने का इंतजार करते हैं।
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