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'धर्म परिवर्तन' को लेकर हिंसक झड़प, 13 लोग घायल, 20 से अधिक के खिलाफ केस दर्ज, जानिए पूरा मामला

Edited By: Dhyanendra Chauhan @dhyanendraj
Published : Sep 15, 2025 06:17 pm IST, Updated : Sep 15, 2025 06:22 pm IST

घर में हो रही प्रार्थना सभा में करीब 150 लोग शामिल थे। इन लोगों को जैसे ही पता चला कि इनका धर्मांतरण कराया जा रहा है तो बजरंग दल को मामले की जानकारी दी।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV सांकेतिक तस्वीर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक प्रार्थना सभा के दौरान धर्म परिवर्तन को लेकर दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में कम से कम 13 लोग घायल हो गए। पथराव की यह घटना रविवार को बिलासपुर के सीपत इलाके में हुई। इसके बाद दोनों पक्षों की शिकायतों पर 20 से अधिक लोगों के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गईं।

घर के अंदर प्रार्थना सभा का आयोजन

इस मामले की अधिक जानकारी देते हुए सीपत पुलिस स्टेशन हाउस ऑफिसर गोपाल सतपथी ने कहा कि ईसाई समुदाय द्वारा माता-चौरा चौक के पास एक घर में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। जहां 150 से अधिक पुरुष, महिलाएं और बच्चे जमा हुए थे।

धर्म परिवर्तन कराने का संदेह

उन्होंने कहा कि एक पादरी की उपस्थिति में समारोह के दौरान बाइबिल की प्रतियों सहित धार्मिक साहित्य वितरित किए गए थे। सतपथी के अनुसार, यह संदेह होने पर कि प्रार्थना की आड़ में कार्यक्रम के दौरान धर्म परिवर्तन हो रहा था, कुछ स्थानीय निवासियों ने बजरंग दल और अन्य दक्षिणपंथी समूहों से संपर्क किया

घर पर कर दिया पथराव

दक्षिणपंथी समूहों के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और नारे लगाए। पादरी और अन्य आयोजकों को परिसर से बाहर आने को कहा। इसके बाद एक समूह ने घर पर पथराव किया। दूसरे पक्ष की ओर से भी पथराव होने लगा। इसी बीच हिंसकी झड़प हो गई।

हिंसक झड़प में 10 ईसाई समुदाय के लोग घायल

पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और दोनों पक्षों को शांत कराया। झड़प में ईसाई समुदाय के कम से कम 10 सदस्य और तीन दक्षिणपंथी कार्यकर्ता घायल हो गए। सतपथी ने बताया कि ईसाई समुदाय के सात सदस्यों को हिरासत में लिया गया और एक पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां से उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।

कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला

दक्षिणपंथी समूहों के 12 से अधिक सदस्यों पर सीपत पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी में दंगा, धमकी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य अपराधों का आरोप लगाया गया था। ईसाई समुदाय के सात लोगों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 (सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना) और धारा 299 (धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने के इरादे से किए गए कृत्य) और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अलग-अलग मामला दर्ज किया गया है। पुलिस की टीम मामले की जांच कर रही है। (इनपुट- पीटीआई)

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