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1986 में पत्नी की हत्या करके फरार हो गया था शख्स, 40 साल बाद पुलिस ने यूं ढूंढ़ निकाला

 Published : Apr 23, 2026 09:39 pm IST,  Updated : Apr 23, 2026 09:39 pm IST

दिल्ली पुलिस ने 1986 में पत्नी की हत्या कर फरार हुए 82 वर्षीय चंद्रशेखर प्रसाद को 40 साल बाद गिरफ्तार किया। शकरपुर में अपनी पत्नी की हत्या के बाद वह फर्जी पहचान के सहारे इतने सालों तक छिपा रह गया था।

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दिल्ली पुलिस ने पत्नी की हत्या के आरोपी को 40 साल बाद गिरफ्तार किया। Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने एक लंबे समय से अनसुलझे मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 1986 में अपनी पत्नी की हत्या कर फरार हुए 82 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इस तरह देखा जाए तो यह गिरफ्तारी करीब 40 साल बाद की गई है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी चंद्रशेखर प्रसाद को बाहरी उत्तरी दिल्ली के नांगली पूना स्थित एक कारखाने के गोदाम से गिरफ्तार किया गया, जहां वह फर्जी पहचान के तहत रह रहा था। आरोपी मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है।

'1987 में अदालत ने भगोड़ा घोषित किया था'

यह मामला 19 अक्टूबर 1986 का है। उस समय लगभग 40 वर्ष के रहे प्रसाद ने पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाके में अपने घर में अपनी पत्नी की कथित तौर पर हत्या कर दी थी। हत्या का कारण पत्नी के विवाहेतर संबंध को लेकर उसका संदेह बताया गया है। पुलिस के अनुसार, 'उसने और उसके साथियों ने घटनास्थल से भागने से पहले एक घरेलू सहायिका को बंदूक दिखा कर बंधक बना लिया था।' इस मामले में शकरपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 34 (साझा मंशा से किया गया अपराध) के तहत केस दर्ज किया गया था। 1987 में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।

आरोपी को पकड़ने में इतने साल क्यों लग गए?

पुलिस ने बताया कि यह मामला वर्षों तक अनसुलझा रहा क्योंकि उस समय आधुनिक जांच उपकरण, डिजिटल रिकॉर्ड, तस्वीरें, आधार या मोबाइल डेटा जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके अलावा सुरागों की कमी के कारण आरोपी का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया था। हाल ही में अपराध शाखा की एक टीम ने पुराने अनसुलझे मामलों की समीक्षा के दौरान इस केस को फिर से खोला। जांच में मुखबिरों और तकनीकी निगरानी की मदद ली गई।

'आरोपी के बच्चे दिल्ली और बिहार में बसे हैं'

अधिकारी ने बताया, 'जांचकर्ताओं ने पाया कि उसके बच्चे दिल्ली और बिहार में बसे हुए हैं, और उन्होंने परिवार से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबरों पर सावधानीपूर्वक नजर रखी। नालंदा में जांच से पुष्टि हुई कि प्रसाद जीवित है और पारिवारिक या धार्मिक आयोजनों के दौरान कभी-कभार आता है।' इसके बाद एक संदिग्ध यात्रा की सूचना मिलने पर पुलिस ने निगरानी बढ़ा दी और दिल्ली में उसकी गतिविधियों पर नजर रखी। 22 अप्रैल को उसे अलीपुर स्थित एक कारखाने से गिरफ्तार कर लिया गया।

हरियाणा के एक आश्रम में भी रहा था आरोपी

पूछताछ में आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के मुताबिक, 'प्रसाद ने बताया कि पत्नी के चरित्र पर शक के कारण वह अक्सर उससे झगड़ा करता था। एक दिन गुस्से में आकर उसने पत्नी की हत्या कर दी और फरार हो गया।' पुलिस ने यह भी बताया कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने दशकों तक अपनी पहचान बदलकर जीवन बिताया और बिहार, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर रहा। उसने पंजाब के पटियाला में रिक्शा चलाया और हरियाणा के एक आश्रम में भी शरण ली थी।

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