दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) तरणजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में दिल्ली डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद और प्रवेश वर्मा भी शामिल हुए।
बैठक में दिल्ली की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक बड़ा सुझाव सामने आया। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने फायर सर्विस को मजबूत करने के लिए, मौजूदा खाली जगहों को भरने के लिए रिटायर्ड अग्निवीरों को काम पर रखने का सुझाव दिया है। साथ ही, पिछले हफ्ते बनाई गई अधिकारियों की टीमों को समय पर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATRs) जमा करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान दिल्ली में गैर-कानूनी इमारतों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन, फायर सेफ्टी के संबंध में लाइसेंस के गलत इस्तेमाल और भविष्य की तैयारी के उपायों का पूरी तरह से रिव्यू किया गया। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि दिल्ली की आपदा की कमजोरियां बड़ी चुनौतियां पेश करती हैं, लेकिन वे तैयारी को मजबूत करने, मजबूती बनाने और रिस्पॉन्स सिस्टम को बेहतर बनाने का मौका भी देती हैं। साथ ही, कार्रवाई आम लोगों के लिए परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए।
कौन होते हैं अग्निवीर, कितने साल की नौकरी होती है?
आपको बता दें कि अग्निवीर भारत सरकार की 'अग्निपथ योजना' के तहत भारतीय सेना (थल सेना, नौसेना और वायुसेना) में भर्ती होने वाले जवानों को कहा जाता है। केंद्र सरकार ने जून 2022 में इस योजना की शुरुआत की थी। अग्निवीर बनने के लिए भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइटों के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद उम्मीदवारों को एक चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसमें कंप्यूटर आधारित लिखित परीक्षा (CBT), शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल टेस्ट शामिल हैं। इसके लिए योग्यता पद के अनुसार 10वीं या 12वीं पास होती है और उम्र सीमा 17.5 साल से 22 साल के बीच होनी चाहिए।
अग्निवीरों की कुल नौकरी 4 साल की होती है, जिसमें शुरुआती 6 महीने की ट्रेनिंग भी शामिल है। 4 साल की सेवा पूरी होने के बाद सभी अग्निवीरों के कार्यकाल की समीक्षा की जाती है। उनके प्रदर्शन, अनुशासन और सेना की जरूरतों के आधार पर 25% अग्निवीरों को सेना में स्थाई कर दिया जाता है, जो आगे 15 साल तक देश की सेवा करते हैं। बाकी बचे 75% अग्निवीरों को ससम्मान सेवामुक्त कर दिया जाता है, जिन्हें पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बलों (जैसे- BSF, CISF) और विभिन्न राज्य सरकारों की नौकरियों में प्राथमिकता मिलती है।
ये भी पढ़ें-INDIA ब्लॉक की आज अहम बैठक, आखिर CM विजय की TVK को क्यों नहीं मिला न्योता?