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UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 : राज्यसभा में उठी परीक्षार्थियों को एक्स्ट्रा चांस देने की मांग

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 16, 2021 04:14 pm IST,  Updated : Mar 16, 2021 04:14 pm IST

राज्यसभा में मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के एक सदस्य ने कोविड-19 महामारी के कारण पिछले साल कई परीक्षार्थियों के संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने का मुद्दा उठाया और ऐसे उम्मीदवारों को एक और मौका दिए जाने की मांग की।

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UPSC Civil Services Exam 2021 Demand for giving extra chance to the candidates who have risen in Rajya Sabha Image Source : FILE

राज्यसभा में मंगलवार को आम आदमी पार्टी (आप) के एक सदस्य ने कोविड-19 महामारी के कारण पिछले साल कई परीक्षार्थियों के संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाने का मुद्दा उठाया और ऐसे उम्मीदवारों को एक और मौका दिए जाने की मांग की। आप सदस्य संजय सिंह ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई परीक्षार्थी खुद ही कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे जबकि कई उम्मीदवारों के परिवारों के सदस्य संक्रमित हो गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे भी मामले हैं जिनमें परीक्षार्थियों के परिवारों के सदस्यों की मौत इस महामारी के कारण हो गयी।

सिंह ने कहा कि परीक्षा नहीं दे पाने वाले कई उम्मीदवार डॉक्टर, पुलिसकर्मी और अन्य सेवाओं में हैं और वे महामारी के दौरान भी सेवा में लगे हुए थे।उन्होंने सरकार से मांग की कि वह ऐसे उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और उन्हें एक और मौका दे। उन्होंने कहा कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय में भी कहा था कि वह इस संबंध में विचार कर रही है। 

    
शून्यकाल में ही भाजपा के बृजलाल ने महात्मा बुद्ध से संबंधित स्थान कपिलवस्तु का जिक्र किया और उसे विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु में खुदाई में स्तूप के अलावा कुछ अस्थियां भी मिली थीं जिन्हें संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। बृजलाल के अनुसार, कहा जाता है कि ये अस्थियां भगवान बुद्ध की हैं।
    
उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु नेपाल की सीमा के पास है लेकिन वहां बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में वहां ठहरने की पर्याप्त सुविधा विकसित करने के अलावा हवाई पट्टी का भी निर्माण किया जाए जिससे बड़ी संख्या में बाहर से लोग आ सकेंगे। इससे रोजगार सृजन होने के साथ साथ उस क्षेत्र का पिछड़ापन भी दूर होगा।
    
शून्यकाल में ही बीजद के प्रसन्न आचार्य ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के बढ़ने का मुद्दा उठाया। उन्होंने विभिन्न आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों के बाद भी ऐसे अपराधों में वृद्धि हो रही है जो चिंता की बात है। 

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