नई दिल्ली: 7 जुलाई 1896 को मुंबई के वाटसन थियेटर में लुमीयर ब्रदर्स नाम के दो फ्रांसिस अपनी फिल्म लेकर भारत आए। इस फिल्म का प्रीमियर 200 लोगों ने देखा था और फिल्म के लिए टिकट का दाम 2 रुपए रखा गया था। उस जमाने के हिसाब से अपने आप में यह एक बड़ी रकम मानी जाती थी। कुछ दिनों बाद दोनों ब्रदर्स की ये फिल्में मुंबई के नावेल्टी थिएटर में प्रदर्शित की गई ।
पहला सिनेमा घर
1904 में भारत का पहला सिनेमाघर बना और इसका बनाने का श्रेय जाता है मणि सेठना को। यहां सबसे पहले विदेश से आई द लाइफ ऑफ क्राइस्ट दिखाई गई। यह वह फिल्म थी जिसे देखने के बाद भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के को भारती सिनेमा की नींव रखने की प्रेरणा मिली थी।
साल 1913 : भारतीय सिनेमा को मिली अपनी पहली फिल्म
भारतीय सिनेमा के इतिहास में 1913 का साल एक बड़ी खबर लेकर आया और दादा साहब फाल्के ने राजा हरिश्चंद्र नामक पहली पूरी लंबाई की फीचर फिल्म बनाई। 40 मिनट की अवधि वाली यह एक मूक फिल्म थी लेकिन यह वहीं फिल्म थी जिसने भारतीय सिनेमा के आगाज की शुरुआत की थी । इस फिल्म को 3 मई 1913 को रिलीज किया गया था ।
देविका रानी : भारत की पहली एक्ट्रेस जिनको जनता ने फिल्मस्टार नाम से पुकारा
1933 में फिल्म कर्मा रिलीज हुई और फिल्म की नायिका देविका रानी के अभिनय को देखने के बाद लोग उनको फिल्म स्टार नाम से पुकारने लगे इस तरह से वे देश की पहली महिला फिल्म स्टार बन गई।
आलमआरा : भारतीय सिनेमा की पहली बोलती फिल्म
वैसे बॉलीवुड के इतिहास में पहली बोलती फिल्म का दर्जा आलम आरा के नाम दर्ज है।
आज का सवाल : भारत की उस पहली फिल्म का नाम बताइए जिसे सबसे पहले कांस फिल्म समारोह में अवार्ड मिला था ?
1. मदर इंडिया
2. दो बीघा जमीन
3. सुजाता
4. लगान
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