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हरीश राणा की 'इच्छामृत्यु' जैसी ही है 16 साल पुरानी फिल्म, दो सुपरस्टार ने फूंकी जान, क्लाइमेक्स देख छलक पड़ेंगे आंसू

Written By: Jaya Dwivedie @JDwivedie Published : Mar 12, 2026 11:09 am IST, Updated : Mar 12, 2026 11:09 am IST

हरीश राणा की 'इच्छामृत्यु' का मामला भारत में छाया हुआ है। इस तरह की एक कहानी बॉलीवुड में की एक फिल्म में दिखाई गई। फिल्म में ऐश्वर्या राय लीड रोल में थीं और फिल्म का क्लाइमेक्स रुला देने वाला है।

Guzaarish- India TV Hindi
Image Source : STILL FROM GUZAARISH गुजारिश की एक कहानी।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत ही भावुक और गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाया है। यह मामला हरीश राणा का है, जो पिछले 13 सालों से अचेत कोमा जैसी स्थिति अवस्था में बेड पर पड़े हुए थे। बीटेक की पढ़ाई कर रहे हरीश के साथ साल 2013 में एक दर्दनाक हादसा हुआ था, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। लंबे समय तक इलाज और इंतजार के बाद जब कोई सुधार नहीं दिखा तो थक-हारकर उनके माता-पिता ने कोर्ट से अपने ही बेटे के लिए इच्छामृत्यु की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने अब हरीश का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की अनुमति दे दी है, ताकि उन्हें इस अंतहीन पीड़ा से मुक्ति मिल सके।

कैसे शुरू हुआ यह दर्दनाक सफर?

हरीश राणा गाजियाबाद के रहने वाले थे और चंडीगढ़ में बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। अगस्त 2013 में वे अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे में उनके सिर पर इतनी गंभीर चोट आई कि वे वेजिटेटिव स्टेट (ऐसी स्थिति जिसमें शरीर जीवित रहता है पर दिमाग काम नहीं करता) में चले गए। हादसे से पहले हरीश एक होनहार छात्र और फिटनेस के शौकीन युवक थे। उन्हें जिम जाना और प्रतियोगिताओं में भाग लेना पसंद था, लेकिन उस एक पल ने उनके सारे सपनों को खत्म कर दिया। उनके माता-पिता ने 13 साल तक अपने लाडले को बेबस देखा, जो किसी भी पत्थर दिल को दहला देने वाली बात है।

फिल्म 'गुजारिश' और इच्छामृत्यु का विवाद

हरीश राणा के इस केस ने साल 2010 में आई संजय लीला भंसाली की फिल्म 'गुजारिश' की यादें ताजा कर दी हैं। यह फिल्म भी इच्छामृत्यु जैसे संवेदनशील विषय पर आधारित थी। फिल्म में ऋतिक रोशन ने ईथन मस्करेन्हा नाम के एक जादूगर का किरदार निभाया था, जो एक हादसे के बाद पूरी तरह लकवाग्रस्त हो जाता है। 14 साल तक बिस्तर पर रहने और अपनी नर्स सोफिया (ऐश्वर्या राय) की देखभाल के बावजूद, जब उसे लगा कि अब जीने में सिर्फ दर्द है तो उसने कोर्ट से अपनी जान खत्म करने की इजाजत मांगी थी। फिल्म में उसे ये कोर्ट इज्जात दे देती है, जिसके बाद वो एक फेरवेल पार्टी होस्ट करता है और आखिर में अपनी प्रेमिका की मदद से आखिरी सांस लेता है।

फिल्म को लेकर हुआ था भारी विरोध

जब 'गुजारिश' रिलीज हुई थी तब इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। एक वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म का विरोध किया था। उनका तर्क था कि भारत में इच्छामृत्यु कानूनी नहीं है, इसलिए ऐसी फिल्म दिखाना समाज में गलत संदेश भेज सकता है। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन इसने समाज को एक जरूरी मुद्दे पर सोचने के लिए मजबूर किया। खुद भंसाली ने भी बाद में कहा था कि उन्होंने यह फिल्म किसी करीबी व्यक्ति के दर्द को देखकर बनाई थी।

कोर्ट का मानवीय फैसला

हरीश राणा के केस में सुप्रीम कोर्ट ने एम्स (AIIMS) दिल्ली को निर्देश दिया है कि लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया बहुत सावधानी से और योजनाबद्ध तरीके से की जाए। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि मरीज की गरिमा और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। यह फैसला उन माता-पिता के लिए बहुत भारी है, जिन्होंने बरसों अपने बच्चे के ठीक होने की दुआ की, लेकिन अंत में उसकी असहनीय पीड़ा को खत्म करने के लिए मौत की मांग करनी पड़ी।

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