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हीरो के तौर पर किया डेब्यू, लेकिन फ्लॉप रहा करियर तो उठा ली कलम और पलट दिया इतिहास, आज बेटा है सुपरस्टार

 Published : Nov 24, 2025 06:00 am IST,  Updated : Nov 24, 2025 06:00 am IST

सलीम खान एक्टर के तौर पर सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर इतिहास रच दिया। दूसरी तरफ, उनके बेटे सलमान खान बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार में से एक बन गए और आज बेहिसाब दौलत के मालिक हैं।

Salman khan- India TV Hindi
सलमान खान अपने पिता सलीम खान Image Source : INSTAGRAM/@BEINGSALMANKHAN

फिल्मी दुनिया एक ऐसी जगह है, जहां हर किसी को आसानी से सफलता नहीं मिलती चाहे स्टार किड्स और या फिर कोई नया चेहरा। कभी-कभी तो एक ही परिवार में जन्में लोगों को भी वो सफलता नहीं मिल पाती, जिसकी वो उम्मीद करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक एक्टर के बारे में बताएंगे जो आगे चलकर सुपरस्टार बना। उनके पिता ने भी फिल्म एक्टर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था, लेकिन उन्हें अपने बेटे जितनी शोहरत नहीं मिली। हम जिस पिता-बेटे की जोड़ी की बात कर रहे हैं, वह कोई और नहीं बल्कि सलमान खान और उनके पिता सलीम खान हैं।

हीरो नहीं, स्क्रिप्ट राइटर बन हुए मशूहर

सलीम खान एक्टर के तौर पर सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर इतिहास रच दिया। दूसरी ओर, उनके बेटे सलमान खान बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार में से एक बने और आज बॉलीवुड पर राज कर रहे हैं। सलीम खान का जन्म 24 नवंबर 1935 को इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका जन्म ब्रिटिश भारत के इंदौर राज्य में एक संपन्न परिवार में हुआ था। वह हमेशा से फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर बनने का सपना देखते थे। उन्होंने 1960 के दशक में कुछ फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें किसी भी फिल्म में लीड रोल करने का मौका नहीं मिला और वह सपोर्टिंग रोल में ही दिखे।

सलीम खान को कैसे मिला नेम-फेम

1960 के दशक में सलीम खान एक हैंडसम सपोर्टिंग एक्टर के तौर पर टाइपकास्ट हो गए थे और उन्हें अपने काम के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें कुछ ऐसी फिल्में भी करनी पड़ीं जो वो नहीं करता चाहते थे। कुछ रोल इतने छोटे थे कि उन्हें उनका क्रेडिट भी नहीं मिला। करीब दो दर्जन फिल्मों में छोटे रोल करने के बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा बदल ली। सलीम खान की पहली फिल्म 1960 में आई 'बरसात' थी। इसके बाद वे 'पुलिस डिटेक्टिव' फिल्म में दिखे। बाद में उन्होंने 'सरहदी लुटेरा' (1966), 'दीवाना' (1967), 'तीसरी मंजिल' (1966), 'प्रोफेसर' (1962), 'काबिल खान' (1963) और 'छैला बाबू' जैसी कई फिल्में कीं, लेकिन सलीम खान एक्टर के तौर पर फ्लॉप रहे और एक स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर इतने हिट हुए कि उनका कोई मुकाबला नहीं है।

मशहूर स्क्रिप्ट राइटर का सुपरस्टार बेटा

सलीम-जावेद की जोड़ी हिंदी सिनेमा में बहुत हिट थी। उन्होंने जावेद अख्तर के साथ मिलकर 1970-80 के दशक में बॉलीवुड को कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, जिनमें 'शोले' (1975), 'दीवार' (1975), 'त्रिशूल' (1978), 'डॉन' (1978) और 'जंजीर' (1973) जैसी फिल्में शामिल हैं। सलीम खान के तीन बेटे हैं, लेकिन सिर्फ एक बेटा ही सुपरस्टार बना और वो सलमान खान हैं। सलीम खान के बेटे सलमान खान ने 1988 में फिल्म 'बीवी हो तो ऐसी' से अपने करियर की शुरुआत की और फिर 1989 की फिल्म 'मैंने प्यार किया' से रातों-रात सुपरस्टार बन गए। सलमान खान आज बॉलीवुड में एक जाने-माने सुपरस्टार हैं और सबसे अमीर एक्टर्स में से एक हैं। वह न सिर्फ फिल्मों से बल्कि ब्रांड एंडोर्समेंट, इवेंट्स, शो, होस्ट के तौर पर और अपने प्रोडक्शन हाउस (SKF) से भी खूब पैसा कमाते हैं।

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