दिल्ली की गलियों से निकलकर एक लड़का ऐसा आया, जिसने देखते-देखते लाखों दिलों पर राज कर लिया। दमदार पर्सनैलिटी, जबरदस्त फिटनेस और स्क्रीन पर रौबदार अंदाज, टीवी पर एक अमीर और अकड़ू बिज़नेसमैन के किरदार ने उसे रातोंरात स्टार बना दिया। यह किरदार था अर्णव सिंह रायजादा और शो था ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’। यहीं से शुरू हुई बरुण सोबती की कामयाबी की कहानी, जिसने उन्हें टेलीविजन का सुपरस्टार बना दिया। आज बरुण सोबती अपनी अपकमिंग वेब सीरीज ‘कोहरा 2’ को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं और फैंस उन्हें नए अवतार में देखने के लिए उत्साहित हैं।
दिल्ली से स्टारडम तक का सफर
बरुण सोबती का जन्म 21 अगस्त 1984 को दिल्ली में हुआ था। वह 41 साल के हो चुके हैं, लेकिन उनकी पॉपुलैरिटी और चार्म आज भी बरकरार है। उनके पिता का नाम राज सोबती है और उनकी एक बहन हैं, ऋचा अरोड़ा। बरुण हमेशा से अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते आए हैं। यही वजह है कि उनकी निजी जिंदगी को लेकर बहुत ज्यादा जानकारियां पब्लिक डोमेन में नहीं मिलतीं। दिलचस्प बात यह है कि बरुण का ग्लैमर वर्ल्ड में आना किसी प्लान का हिस्सा नहीं था। उन्हें कभी एक्टर बनने का शौक नहीं था, बल्कि यह सफर महज़ एक इत्तेफाक की तरह शुरू हुआ।
पढ़ाई, पहली नौकरी और 200 रुपये की सैलरी
बरुण ने दिल्ली के पश्चिम विहार स्थित सेंट मार्क्स स्कूल से पढ़ाई की। यही वह जगह थी, जहां उनकी मुलाकात अपने पहले प्यार से हुई, जो आगे चलकर उनकी पत्नी बनीं। कॉलेज लाइफ को लेकर वह ज्यादा बात नहीं करते, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। आज लाखों रुपये कमाने वाले बरुण की पहली कमाई सिर्फ 200 रुपये थी। उन्होंने यह पैसे एक डिनर सेट बेचकर कमाए थे। बचपन में वह काफ़ी शरारती हुआ करते थे, जिस वजह से उनकी मम्मी को कई बार स्कूल बुलाया जाता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद बरुण ने करीब 7 साल तक एक बीपीओ में ऑपरेशन मैनेजर के तौर पर काम किया। साल 2009 में दोस्त करण वाही की सलाह ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी और उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखा।
स्कूल से शुरू हुई लव स्टोरी
बरुण सोबती की लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनकी पत्नी का नाम पश्मीन मनचंदा है। दोनों की पहली मुलाकात 9वीं क्लास में स्कूल के दिनों में हुई थी। कॉलेज की पढ़ाई के लिए पश्मीन ऑस्ट्रेलिया चली गईं, लेकिन इसके बावजूद दोनों ने सालों तक लॉन्ग-डिस्टेंस रिलेशनशिप को मजबूती से निभाया। आज यह सुपरहिट कपल दो बच्चों, एक बेटी और एक बेटे के माता-पिता हैं। इनके परिवार में एक प्यारा सा डॉगी भी है, जो उनकी ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। बरुण सोबती की कहानी इस बात का सबूत है कि कभी-कभी जिंदगी अचानक ऐसा मोड़ लेती है, जो इंसान को उसकी सबसे बड़ी पहचान दिला देता है।
टीवी से ओटीटी तक का सफर
बरुण सोबती का सफर टीवी से ओटीटी तक किसी तय प्लान का नतीजा नहीं, बल्कि समझदारी भरे फैसलों और कंटेंट के चुनाव का परिणाम है। ‘इस प्यार को क्या नाम दूं’ से बरुण रातोंरात टीवी स्टार बन गए थे। अर्णव सिंह रायजादा के किरदार ने उन्हें जबरदस्त फैनबेस दिया, लेकिन इसी लोकप्रियता के बावजूद बरुण ने खुद को सिर्फ टेलीविजन तक सीमित रखने से इनकार किया। टीवी पर लगातार लीड रोल्स करने के बजाय उन्होंने ब्रेक लिया, एक ऐसा कदम जो उस दौर में काफी रिस्की माना जाता था। इसके बाद बरुण ने फिल्मों और वेब प्रोजेक्ट्स की ओर रुख किया, जहां उन्हें अलग-अलग और ग्रे शेड्स वाले किरदार निभाने का मौका मिला। ‘मैं और चार्ल्स’, ‘22 यार्ड्स’ जैसी फिल्मों ने उनके एक्टर के तौर पर रेंज को दिखाया, भले ही ये फिल्में मेनस्ट्रीम हिट न रही हों।
इस सीरीज से करेंगे धमाका
ओटीटी ने बरुण के करियर को नई दिशा दी। ‘असुर’, ‘कोहरा’ और ‘द नाइट मैनेजर’ जैसी वेब सीरीज में उन्होंने इंटेंस और रियलिस्टिक परफॉर्मेंस दी, जिसने क्रिटिक्स और नए दर्शकों का ध्यान खींचा। यहां उनकी स्टार इमेज से ज्यादा अहम उनकी एक्टिंग बन गई। आज बरुण सोबती टीवी स्टार ही नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद ओटीटी एक्टर माने जाते हैं, जो कम, लेकिन दमदार काम में यकीन रखते हैं। अब जल्द ही बरुण सोबती 'कोहरा 2' में नजर आएंगे। इस वेब सीरीज में मोना सिंह भी लीड रोल में हैं। ये सीरीज नेटफ्लिक्स पर देखने को मिलेगी, 11 फरवरी को ये स्ट्रीम होने वाली है।
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