Friday, January 30, 2026
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मर्दानी 3 रिव्यू: क्राइम, सत्ता और सच्चाई की परतें खोलती रानी मुखर्जी की फिल्म, जानें कैसी हैं 'शिवानी शिवाजी रॉय'

'मर्दानी 3' में रानी मुखर्जी एक दमदार क्राइम थ्रिलर में शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में वापसी कर रही हैं। यह फिल्म कई डार्क थीम को संवेदनशीलता के साथ दिखाती है और इसमें दमदार परफॉर्मेंस हैं, खासकर मुखर्जी और मल्लिका प्रसाद की।

Anindita Mukhopadhyay
Published : Jan 30, 2026 03:39 pm IST, Updated : Jan 30, 2026 03:39 pm IST
rani mukerji- India TV Hindi
Photo: STILL FROM TRAILER रानी मुखर्जी।
  • फिल्म रिव्यू: मर्दानी 3
  • स्टार रेटिंग: 3.5 / 5
  • पर्दे पर: 30/01/2025
  • डायरेक्टर: अभिराज मीनावाला
  • शैली: क्राइम थ्रिलर

जब किसी फिल्म में लीड एक्टर के तौर पर रानी मुखर्जी का नाम जुड़ा हो, तो एक अनकहा भरोसा अपने आप बन जाता है। और इसकी वजह भी साफ है। तीन दशकों के अपने करियर में रानी ने जिस तरह के किरदार चुने हैं, उसने दर्शकों के मन में उनकी एक मजबूत और विश्वसनीय छवि बना दी है। यही कारण है कि जब 2014 में उन्होंने पहली बार मर्दानी में एक पुलिस ऑफिसर का किरदार निभाया तो यह तय था कि दर्शकों को कुछ अलग देखने को मिलेगा। इसके बाद 2019 में मर्दानी 2 आई और फिर सात साल के लंबे इंतजार के बाद मर्दानी 3 रिलीज हुई। सवाल यही है कि क्या रानी मुखर्जी की यह लेटेस्ट फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती है, जो इस फ्रेंचाइजी से जुड़ी हैं?

मर्दानी 3: कहानी

फिल्म की कहानी एक हाई-प्रोफाइल वीआईपी की बेटी और उसके घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी के किडनैप से शुरू होती है। रानी मुखर्जी एक बार फिर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आती हैं। ड्रग्स के लिए महिलाओं की ट्रैफिकिंग से जुड़े एक मामले में दमदार एंट्री के बाद, शिवानी इस ‘बेटी को बचाने’ वाले केस की जांच अपने हाथ में लेती हैं। जांच के दौरान शिवानी एक गहरी और डरावनी साजिश में उलझती चली जाती हैं। एक के बाद एक अपराध सामने आते हैं, जिनकी जड़ें एक खौफनाक मैट्रिआर्क अम्मा (मल्लिका प्रसाद) तक पहुंचती हैं। जैसे ही शिवानी को लगता है कि वह सच के करीब पहुंच रही हैं, उन्हें एहसास होता है कि मामला जितना दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा गहरा है। कई ऐसे अपराध सामने आते हैं, जो अब तक जमीन के नीचे दबे हुए थे। भरोसे और सत्ता का दुरुपयोग होता है, कड़वी सच्चाइयां उजागर होती हैं और ऐसे मुद्दों को उठाया जाता है, जिन पर आवाज़ उठाना बेहद जरूरी है, यही फिल्म की आत्मा है।

मर्दानी 3: मजबूत पहलू

मर्दानी 3 पहले ही सीन से दर्शकों को बांध लेती है। फिल्म में शायद ही कोई पल ऐसा हो, जो बोर करे। जो कहानी एक साधारण किडनैपिंग केस के रूप में शुरू होती है, वह धीरे-धीरे उन गंभीर मुद्दों को छूती है, जो लंबे समय से समाज को भीतर ही भीतर परेशान कर रहे हैं। करीब 2 घंटे 9 मिनट की अवधि में मेकर्स कई क्राइम थीम्स को समेटने की कोशिश करते हैं। फिल्म संवेदनशीलता, भीख मंगवाने वाले माफिया, इंसानों पर किए जाने वाले एक्सपेरिमेंट और महिलाओं के खिलाफ क्रूरता जैसे गंभीर विषयों को एक साथ पिरोती है। ये सभी थीम्स अलग-अलग बिंदुओं पर एक-दूसरे से जुड़ती हैं और उन्हें काफी सावधानी से ट्रीट किया गया है। सच कहें तो फिल्म में बोरियत ढूंढना मुश्किल हो जाता है।

फिल्म सिस्टम की खामियों को उजागर करने से भी पीछे नहीं हटती। यह दिखाया गया है कि कैसे ईमानदार ऑफिसर्स ‘आदेशों’ और सच्चाई के बीच फंस जाते हैं और कभी-कभी अपनी वर्दी और तयशुदा तरीकों से आगे बढ़कर फैसले लेने पर मजबूर होते हैं। इसके साथ ही कहानी में ऐसे कई ट्विस्ट और टर्न हैं, जिनकी आप उम्मीद नहीं करते और जो आपको पूरी तरह सीट से बांधे रखते हैं।

मर्दानी 3: जहां फिल्म कमजोर पड़ती है

फिल्म के एक बड़े हिस्से में नेशनल अवॉर्ड विनर एक्ट्रेस जानकी बोडीवाला का किरदार अधूरा और कम प्रभावी लगता है। भले ही उनके कैरेक्टर आर्क के पीछे एक खास वजह हो, लेकिन फिर भी ऐसा महसूस होता है कि उनके टैलेंट का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं किया गया। फिल्म का दूसरा हाफ कुछ जगहों पर खिंचा हुआ और लंबा लगता है। इस बार कहानी का फोकस शिवानी शिवाजी रॉय की प्रोफेशनल ज़िंदगी पर रखा गया है, न कि उनकी पर्सनल लाइफ पर। हालांकि उनके रील पति जिस्सू सेनगुप्ता एक छोटे से कैमियो में दिखाई देते हैं। यहां-वहां कुछ हल्के और बिना तनाव वाले पल होते, तो अनुभव और बेहतर हो सकता था।

मर्दानी 3: अभिनय

रानी मुखर्जी इस फिल्म की आत्मा हैं। वह पूरी फिल्म को अपने कंधों पर उठाए हुए हैं और बार-बार यह एहसास कराती हैं कि वह इस किरदार के लिए क्यों परफेक्ट हैं। शिवानी शिवाजी रॉय जिस सहजता से मारती हैं, मुक्के बरसाती हैं और अपराधियों का सफाया करती हैं, वह सब कुछ बेहद नेचुरल लगता है। इस बार वह अपराधों के स्तर और उनके पीछे छिपे दिमाग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आती हैं। रानी पूरी ईमानदारी और ऊर्जा के साथ फिल्म को संभालती हैं और हर सीन में अपना सर्वश्रेष्ठ देती हैं। जब भी वह स्क्रीन पर आती हैं, कुछ नया लेकर आती हैं, जिससे इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद अभिनेत्रियों में उनकी जगह और मजबूत होती जाती है।

विलेन अम्मा के किरदार में मल्लिका प्रसाद भी खास तारीफ की हकदार हैं। रानी मुखर्जी खुद कह चुकी हैं कि कोई भी फिल्म अकेले नहीं बनती, यह टीम वर्क का नतीजा होती है, और मल्लिका की परफॉर्मेंस इस बात को साबित करती है। उनका किरदार डरावना, असहज करने वाला और बेहद क्रूर है। वह ऐसी विलेन हैं, जिनसे सिहरन होती है और जब कोई विलेन आपको इस तरह बेचैन कर दे, तो समझिए काम सही हुआ है। रमनुजन के रोल में प्रजेश कश्यप भी काफी प्रभावशाली रहे हैं। उनके किरदार के बारे में ज्यादा जानने के लिए फिल्म देखना ही बेहतर होगा, बिना किसी स्पॉइलर के।

मर्दानी 3: निर्देशन और म्यूजिक

डायरेक्टर अभिराज मिनावाला ने फिल्म को बेहद संतुलित तरीके से संभाला है। वह कहानी के टोन और इमोशनल रिदम को अच्छी तरह समझते हैं। यही वजह है कि रानी जहां जरूरत हो वहां हीरोइक लगती हैं और जहां मांग हो वहां संयमित। सीन जिस तरह सामने आते हैं, उनमें एक साफ कंट्रोल महसूस होता है, जिससे ड्रामा कभी ओवर-द-टॉप नहीं होता। फिल्म की पेसिंग टाइट है और टेंशन को जबरदस्ती थोपने के बजाय उसे धीरे-धीरे बढ़ने दिया गया है। एक्शन सीन प्रभावी हैं लेकिन दिखावटी नहीं, वहीं शांत पलों का भी अपना वजन है। म्यूजिक और साउंड डिजाइन कहानी को सपोर्ट करने का काम करते हैं। कुछ भी गैर-जरूरी या तेज नहीं लगता। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड के साथ पूरी तरह तालमेल बैठाता है और संतुलन बनाए रखता है।

मर्दानी 3: वर्डिक्ट

रानी मुखर्जी की शिवानी शिवाजी रॉय एक बार फिर हिट साबित होती हैं। फिल्म में वह सभी एलिमेंट्स मौजूद हैं, जो एक दमदार और असरदार कॉप ड्रामा से उम्मीद की जाती है।

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