भारतीय सिनेमा में अक्सर बड़े बजट और चकाचौंध वाली फिल्मों का शोर रहता है, लेकिन समय-समय पर कुछ ऐसी फिल्में आती हैं जो अपनी सादगी और बेहद गहरे सस्पेंस से सबको चौंका देती हैं। हाल ही में एक ऐसी ही मर्डर मिस्ट्री ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दस्तक दी है, जिसकी तुलना धमाकेदार फिल्म 'दृश्यम' से की जा रही है। 131 मिनट की यह फिल्म बिना किसी शोर-शराबे के दर्शकों को एक ऐसी थ्रिलिंग राइड पर ले जाती है, जहां सही और गलत की परिभाषा धुंधली पड़ जाती है। अंत तक समझ नहीं आता कि खूनी कौन है, कत्ल कैसे हुआ, लेकिन क्लाइमैक्स में कहानी ऐसी पलटती है कि आंखें फटने लगती हैं। ओटीटी पर रिलीज होते ही यह फिल्म टॉप ट्रेंडिंग लिस्ट में पहले पायदान पर पहुंच गई है, जो इसकी जबरदस्त लोकप्रियता का प्रमाण है। गौर करने वाली बात है कि इसका पहला पार्ट भी लोगों के दिमाग पर असर कर गया था।
कहानी का ताना-बाना
'वध 2' की पटकथा जेल की चारदीवारी और मानवीय बेबसी के इर्द-गिर्द बुनी गई है। फिल्म के केंद्र में शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) हैं, जो मध्य प्रदेश के शिवपुरी जेल में एक साधारण पुलिसकर्मी हैं। अकेलेपन और आर्थिक तंगी से जूझ रहे शंभूनाथ अपने बेटे के विदेशी कर्ज को चुकाने के लिए जेल परिसर में सब्जियां उगाकर बेचने को मजबूर हैं। इसी जेल में मंजू सिंह (नीना गुप्ता) दो हत्याओं के जुर्म में अपनी उम्रकैद की सजा काट रही हैं। कहानी में भूचाल तब आता है जब एक रसूखदार विधायक का भाई केशव जेल पहुंचता है। केशव का आतंक और दबंगई जेल प्रशासन के लिए सिरदर्द बन जाती है। लेकिन असली रोमांच तब शुरू होता है जब एक दिन अचानक केशव अपने बैरक से गायब हो जाता है। इसके बाद शुरू होता है उसे ढूंढने का सिलसिला और रहस्यों की एक ऐसी परत खुलती है, जो दर्शकों को क्लाइमैक्स तक अपनी सीट से हिलने नहीं देती।
अभिनय का पावरहाउस
इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं। संजय मिश्रा ने शंभूनाथ के किरदार में जान फूंक दी है। उनकी खामोशी और आंखों के हाव-भाव शब्दों से ज्यादा संवाद करते हैं, जो उन्हें वर्तमान दौर के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं की श्रेणी में खड़ा करता है। वहीं नीना गुप्ता ने अपनी मंझी हुई अदाकारी से मंजू सिंह के किरदार को एक अलग गहराई दी है। इन दो दिग्गज कलाकारों की केमिस्ट्री फिल्म के गंभीर और डार्क टोन को पूरी तरह से न्याय देती है। फिल्म में कोई बनावटी हीरोइज्म नहीं है, बल्कि दो आम इंसानों की बेबसी और उनके द्वारा उठाए गए खौफनाक कदमों का जीवंत चित्रण है।
निर्देशन और सस्पेंस का नया स्तर
फिल्म का निर्देशन काफी सधा हुआ है। निर्देशक ने 131 मिनट के रनटाइम में एक भी अनावश्यक गाना या सब-प्लॉट नहीं रखा है, जिससे कहानी की गति बनी रहती है। 'वध 2' की तुलना 'दृश्यम' से इसलिए की जा रही है क्योंकि यहां भी एक आम आदमी कानून और व्यवस्था के बीच अपना रास्ता बनाता है, लेकिन इसका तरीका और अनुभव 'दृश्यम' के विजय सलगांवकर से काफी अलग और अधिक यथार्थवादी है।
रिलीज और कहां देखें?
आईएमडीबी पर 7.5 रेटिंग हासिल करने वाली यह फिल्म सोशल मीडिया पर भी मास्टरपीस के रूप में सराही जा रही है। फिल्म की IMDb रेटिंग भले ही 'दृश्यम' से थोड़ी कम हो लेकिन क्रिटिक्स ने इसके सस्पेंस गेम को 'दृश्यम' से ज्यादा आंका है। अगर आप मर्डर मिस्ट्री और साइकोलॉजिकल थ्रिलर के दीवाने हैं तो यह फिल्म आपके लिए एक ट्रीट है। यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। 3 अप्रैल को रिलीज हुई यह फिल्म नेटफ्लिक्स की टॉप 10 लिस्ट में नंबर 1 पर बनी हुई है।
ये भी पढ़ें: बीरबल की सोच से भी चार गुना तगड़ा सस्पेंस, दिमाग सुन्न कर देगा क्राइम थ्रिलर का क्लाइमैक्स, हिलने नहीं देंगे 7 एपिसोड