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300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम, 'रावण' बन मिली पहचान, फिर एक्टिंग छोड़ राजनीति में रखा था कदम

रामानंद सागर की 'रामायण' में राम-सीता के अलावा रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी अपनी दमदार आवाज और अभिनय के लिए आज भी याद किए जाते हैं। हालांकि, 2021 में उनका निधन दिल का दौरा पड़ने से हुआ था।

Written By: Himanshi Tiwari @Himanshi200124
Published : Nov 08, 2025 04:15 pm IST, Updated : Nov 10, 2025 11:26 am IST
ramayan raavan- India TV Hindi
Image Source : SCREEN GRAB FROM YOUTUBE BY TILAK 'रामायण' का रावण

रामानंद सागर की 'रामायण' ने 38 साल पहले टीवी स्क्रीन पर दस्तक दी थी, जिसे आज तक अपनी कहानी से लेकर कास्ट तक के लिए खाद किया जाता है। उस वक्त भारत का ये सबसे पॉपुलर पौराणिक टीवी शो दर्शकों के लिए न सिर्फ मनोरंजन बल्कि आस्था का भी एक हिस्सा बन गया था। 1987 में आई 'रामायण' के हर एक पात्र ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और शूर्पणखा के अलावा रावण का नाम भी शामिल है। टीवी के रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी को इसी सीरियल से प्रसिद्ध मिली।

क्यों बने रामायण के रावण

'रामायण' में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी की डरावनी हंसी और उनका भयावह रंग-रूप आज भी हर किसी को याद है। उन्हें दुनिया को अलविदा कहे 5 साल हो गए हैं, लेकिन एक्टर का नाम सुनते ही सभी को उनका चेहरा याद आ जाता है। यही वजह थी कि उन्हें दशानन का किरदार मिला था। 'रामायण' में रावण को एक कुरूप, असभ्य और लंकापति रावण के रूप में चित्रित किया गया, लेकिन रियल लाइफ में वह बिल्कुल अलग थे।

कैसे मिला था अरविंद त्रिवेदी को रावण का रोल

1987 में रामानंद सागर की 'रामायण' के लिए अरविंद त्रिवेदी ने साधु के किरदार के लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन जैसे ही उन्होंने डायलॉग बोले, उनकी आवाज, चेहरा और हावभाव देखकर रामानंद सागर ने उन्हें रावण का रोल ऑफर कर दिया। इस रोल ने उन्हें टीवी का मोस्ट पॉपुलर स्टार बना दिया। 'रामायण' की शानदार सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1991 में वे गुजरात के साबरकांठा से लोकसभा सांसद चुने गए, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सदस्य के रूप में 5 साल तक संसद में काम किया। इसके बाद 2002 में उन्हें सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

अभिनेता ही नहीं, बेहतरीन राजनेता भी था ये एक्टर

8 नवंबर 1938 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे अरविंद त्रिवेदी बचपन से ही अभिनेता बनना चाहते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने थिएटर से अभिनय की शुरुआत की। उस वक्त अरविंद के साथ उनके बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी भी अभिनय की दुनिया में काम कर रहे थे। अरविंद त्रिवेदी ने लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं की फिल्में शामिल थीं। अरविंद त्रिवेदी को अपने अभिनय के लिए गुजरात सरकार से सात बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला।

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