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Explainer:पार्स क्षेत्र में Israel-US के हमले से क्यों बौखलाया ईरान?...जिसके बाद पूरे मिडिल-ईस्ट में लगा दी आग

 Published : Mar 19, 2026 06:45 pm IST,  Updated : Mar 19, 2026 06:45 pm IST

अमेरिका और इजरायल ने ईरान के दक्षिण पार्स क्षेत्र में हमला करके उसकी रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। हालांकि ईरान ने इसके बाद खाड़ी देशों पर भीषण पलटवार से हाहाकार मचा दिया है, जिसके बाद अब ट्रंप ने पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर हमले नहीं करने के लिए इजरायल को निर्देशित किया है।

ईरान के साउथ पार्स में प्राकृतिक गैस क्षेत्र में ईरान और अमेरिका ने किया हमला। - India TV Hindi
ईरान के साउथ पार्स में प्राकृतिक गैस क्षेत्र में ईरान और अमेरिका ने किया हमला। Image Source : X@IRANINMUMBAI

Explainer: इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग के 20 दिन हो चुके हैं। अब यह युद्ध और भी ज्यादा घातक हो चुका है। इस बीच इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के साउथ पार्स प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर बड़ा हमला किए जाने से तेहरान बौखला गया है। ईरान ने जवाबी हमले में सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर और बहरीन में ऊर्जा संयंत्रों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों से आग लगा दी है। ईरान के इस जवाबी हमले से पूरे मिडिल-ईस्ट में हाहाकार मच गया है। आइये जानते हैं कि ईरान के लिए दक्षिण पार्स क्षेत्र कितना महत्व रखता है, जिसे इजरायल और अमेरिका ने रणनीतिक रूप से निशाना बनाया। इसके बाद युद्ध की आग और भी ज्यादा भड़क उठी है। 

ईरान के लिए दक्षिण पार्स क्षेत्र की क्या है अहमियत?

दक्षिण पार्स सिर्फ ईरान का ही नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस संयंत्र है। यह ईरान के लिए ऊर्जा की मुख्य जीवनरेखा कहा जाता है। इजरायल द्वारा इस क्षेत्र पर हमले ने ईरान को जवाब में मध्य पूर्व के अन्य देशों की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे मिडिल-ईस्ट क्षेत्र और उसके बाहर नए ड्रोन और मिसाइल हमलों की लहरें फैल गईं। ईरान ने कतर और सऊदी अरब जैसे देशों के ऊर्जा संयंत्रों पर बड़े हमले करके खलबली मचा दी। इससे इजरायल और अमेरिका के सामने भी कड़ी चुनौती पैदा हो गई है। 

होर्मुज पर नियंत्रण से ईरान ने अमेरिका और इजरायल को बैकफुट पर पहुंचाया

ईरान युद्ध ने हार्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल और तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के अधिकांश निर्यात को रोककर वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी ऊर्जा झटका दिया है। होर्मुज क्षेत्र पर ईरान का नियंत्रण कायम है। वह इधर से गुजरने वाले सभी तेल टैंकरों को मिसाइलों और ड्रोन के हमलों से निशाना बना रहा है। कुछ टैंकरों को अपनी शर्तों पर गुजरने दे रहा है। इससे इजरायल और अमेरिका दोनों ही बैकफुट पर हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए इस हालात ने यूरोप और एशिया को भारी ऊर्जा संकट के जाल में फंसा दिया है। इस दौरान ईरान ने होर्मुज के अलावा फारस की खाड़ी में भी अपने पड़ोसियों के जहाजों और प्रमुख निर्यात सुविधाओं पर भी हमले किए हैं, जिससे ऊर्जा की कीमतों पर और दबाव बढ़ा है। यह बात अलग है कि सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी पड़ोसी अमेरिका-इजरायल हमलों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। 

ट्रंप ने इजरायल को साउथ पार्स पर दोबारा हमला नहीं करने को कहा

ईरान की बौखलाहट को देखकर अमेरिका भी सकते में आ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान ने जवाबी हमलों से हड़कंप मचा दिया है। बुधवार को किए गए घातक हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान करते हुए कहा कि इजरायल साउथ पार्स पर अब दोबारा हमला नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने इस दौरान सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर ईरान कतर की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले जारी रखता है तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा और पूरे क्षेत्र को “बड़े पैमाने पर उड़ा देगा। साउथ पार्स के मामले में निशाना ईरान के निर्यात नहीं, बल्कि घरेलू ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है, जहां कभी-कभी बिजली उत्पादन में कमी आ जाती है। फारस की खाड़ी के नीचे स्थित यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस क्षेत्र ईरान और कतर के बीच साझा है। ईरानी पक्ष को साउथ पार्स और कतरी पक्ष को नॉर्थ फील्ड कहा जाता है। 

साउथ पार्स क्षेत्र के बारे में मुख्य बातें

  1. ईरान बहुत अधिक प्राकृतिक गैस इस्तेमाल करता है। इसका 80% हिस्सा साउथ पार्स से आता है। 
  2. ईरान बिजली उत्पादन और घरों को गर्म करने के लिए गैस पर बहुत निर्भर है।
  3. अमेरिका, चीन और रूस के बाद यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उपभोक्ता है भले ही उसकी अर्थव्यवस्था बहुत छोटी हो। 
  4. अन्य मध्य पूर्व देशों के विपरीत, ठंडे मौसम के कारण ईरान गैस से हीटिंग करता है और इसका अधिकांश इस्तेमाल सब्सिडी वाला है, जो कुशल उपयोग को हतोत्साहित करता है। 
  5. साउथ पार्स मुख्य रूप से ईरान की घरेलू जरूरतें पूरी करता है, लेकिन हमले की खबर से वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ीं और यूरोप में गैस की कीमतें आसमान छू गईं। 
  6. ईरान प्रतिबंधों और निवेश की कमी से गैस को अपनी पाइपलाइन में डालकर घरेलू उपयोग करता है। 
  7. यह खाना पकाने, घर गर्म करने, बिजली बनाने और उद्योग के कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होती है। 
  8. ईरान अपेक्षाकृत कम निर्यात करता है, लगभग 9 अरब क्यूबिक मीटर। 
  9. ईरान के निर्यात ग्राहक तुर्की और आर्मेनिया हैं, जो वैकल्पिक स्रोतों से प्राप्त कर सकते हैं।
  10. ईरान ने निर्यात के लिए LNG विकसित करने की कोशिश की, लेकिन प्रतिबंधों से रुक गया
  11. ईरान ने फारस की खाड़ी तट पर तीन LNG निर्यात परियोजनाओं की योजना बनाई थी, एक टोटल एनर्जीज और दूसरी शेल के साथ, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंधों ने जरूरी तकनीक और निवेश को रोक दिया। 
  12. असुलायेह में तीसरी साइट हमलों के स्थान के पास  लगभग 20 साल पहले शुरू हुई और अब पूरा होने के करीब है। 
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