India Reply To Pakistan: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की सालाना बैठक के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे। पीएम शरीफ की राष्ट्रपति ट्रंप से यह मुलाकात तब हो रही है जब इससे पहले पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसीम मुनीर हाल के महीनों में 2 बार अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। शरीफ इस दौरान फिर वही घिसा पिटा कश्मीर राग गाएंगे और संभव है कुछ डॉलर का भी जुगाड़ कर लें। शरीफ जितनी चाहे बदमाशी दिखाएं, लेकिन इससे पहले ही भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो टूक बयान देकर बता दिया है कि भविष्य में क्या होने वाला है। कश्मीर तो दूर अब पीओके भी पाकिस्तान के पास नहीं रहेगा। चलिए अब इस पूरी खबर को समझते हैं।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने क्या कहा?
शहबाज शरीफ के अमेरिका दौरे से पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की ओर से एक बयान जारी किया गया है। इस बयान में कहा गया है, "प्रधानमंत्री शरीफ क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ चुनिंदा इस्लामी नेताओं की बैठक में भी भाग लेंगे।" शरीफ की न्यूयॉर्क यात्रा 22 सितंबर से शुरू होगी। 24-25 सिंतबर को शरीफ राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं।
पुराने एजेंडा और प्रोपेगेंडा पर काम करेगा पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कश्मीर के मुद्दे को उठाएंगे। मतलब साफ है कि पाकिस्तान इस दौरान अपने पुराने एजेंडा और प्रोपेगेंडा पर ही काम करेगा। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा है कि पीएम शरीफ 'संघर्ष को रोकने, शांति को बढ़ावा देने और सुरक्षा परिषद के सदस्य के रूप में पाकिस्तान की वर्तमान भूमिका में वैश्विक समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों के साथ काम करने के संकल्प को भी रेखांकित करेंगे।
जानें किसने कहा पीओके हमारा होगा?
यह तो रही पाकिस्तान की बात अब जरा नजर डालते हैं भारत के रुख पर। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मोरक्को की यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने भारतीय समुदाय के साथ बातचीत में कहा, "पीओके अपने आप हमारा होगा। पीओके में मांग उठने लगी हैं, आपने नारे सुने होंगे। मैं 5 साल पहले कश्मीर घाटी में एक कार्यक्रम में भारतीय सेना को संबोधित कर रहा था, तब मैंने कहा था कि हमें पीओके पर हमला करके कब्जा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, वह वैसे भी हमारा है, पीओके खुद कहेगा, 'मैं भी भारत हूं, वह दिन आएगा।"
'ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ रुका है, फिर शुरू किया जा सकता है'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "'जिन्ह मोहि मारा, तिन्ह मोहि मारे'...इस बार भी यही हुआ। हमने उन्हीं लोगों को मारा जिन्होंने हमारे लोगों को मारा। हमने किसी नागरिक या सैन्य प्रतिष्ठान पर हमला नहीं किया। केवल भारत ही ऐसा चरित्र रख सकता है। अगर हम चाहते तो किसी भी सैन्य या नागरिक प्रतिष्ठान पर हमला कर सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। हमें भारत के इस चरित्र को कायम रखना चाहिए।" राजनाथ सिंह ने कहा- "आतंकवादी यहां आए और हमारे नागरिकों का धर्म पूछकर उन्हें मार डाला। हमने किसी का धर्म देख नहीं, उनका कर्म देख कर मारा है।" ऑपरेशन सिंदूर बस रुका है, इसे फिर से शुरू किया जा सकता है।"
क्यों कश्मीर राग गाता है पाकिस्तान?
अब जर सच्चाई पर भी गौर करते हैं। वैसे देखा जाए तो पाकिस्तान की राजनीति और कूटनीति का अगर सबसे बड़ा मजाक उसका बार-बार कश्मीर का राग अलापना है। चाहे संयुक्त राष्ट्र का मंच हो, ओआईसी की बैठक हो या फिर किसी अंतरराष्ट्रीय नेता से मुलाकात, पाकिस्तान हमेशा कश्मीर-कश्मीर गाता रहता है। लेकिन इसमें अब ना तो कोई असर रह गया है और ना ही कोई इसे गंभीरत से लेता है। आज पूरी दुनिया समझ चुकी है कि पाकिस्तान का यह शोर सिर्फ अपनी आंतरिक नाकामियों और जनता का ध्यान भटकाने का हथकंडा है।
पाकिस्तान कश्मीर के नाम पर करता है सियासी नौटंकी
हर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ अपनी कुर्सी बचाने के लिए कश्मीर का नाम लेता है। जनता के सामने यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि भारत हमारा दुश्मन है और कश्मीर उनका है। असलियत यह है कि पाकिस्तान अपनी ही जनता को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दे पा रहा। बीते कुछ दशकों में पूरी दुनिया पाकिस्तान की आतंकवाद को पालने-पोसने की नीति को देख चुकी है। कश्मीर को लेकर वह जितना भी रोना रोए, दुनिया अब उस पर यकीन नहीं करती। अमेरिका हो या यूरोप, या फिर खाड़ी देश, सबका झुकाव भारत की ओर है।
आंतरिक बवाल ने ध्यान भटकाने का हथकंडा है कश्मीर
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर है, लोग महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त हैं, प्रांतों में बगावत की आवाजें उठ रही हैं। ऐसे में नेताओं के पास एकमात्र हथियार है कश्मीर का मुद्दा। इस मुद्दे को उठाकर पाकिस्तान के हुक्मराम जनता को गुमराह करते हैं। बार-बार वहीं काम करने की वजह से पाकिस्तान दुनिया में बदनाम हुआ है। उसकी छवि झूठे और आतंक समर्थक देश की बन गई है। यह पाकिस्तान की राजनीतिक बेवकूफी है, क्योंकि बार-बार झूठ बोलने से ना तो कश्मीर उसे मिलेगा और ना ही उसकी कंगाली दूर होगी।
भारत ने क्या किया?
पाकिस्तान और उसके कश्मीर राग का पूरा सच आपने समझ लिया होगा चलिए अब भारत के पक्ष पर भी नजर डालते हैं। भारत ने ना केवल कश्मीर में विकास की गति बढ़ाई है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी यह साबित कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पाकिस्तान ने खूब शोर मचाया, लेकिन उसका कोई असर दुनिया पर नहीं पड़ा है।
फेल हो गई है पाकिस्तान की रणनीति
पाकिस्तान का कश्मीर राग अब पूरी तरह फेल हो चुका है और दुनिया भी इससे पक गई है। आतंकिस्तान की यह रणनीति फेल साबित हो चुकी है। यह ऐसा है जैसे कोई टूटा हुआ रिकॉर्ड बार-बार बजाया जाए, जिसे सुनकर लोग परेशान हो जाएं। असलियत यह है कि पाकिस्तान जितनी जल्दी इस सच्चाई को स्वीकार कर ले कि कश्मीर भारत का हिस्सा है, उतनी ही जल्दी वह अपनी जनता के असली मुद्दों पर ध्यान दे सकेगा। वरना कहीं ये बेवकूफी उसे भारी ना पड़ जाए और उसकी बर्बादी की कहानी लिख दी जाए।
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