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कितनी ट्विशा और दीपिका...आखिर क्यों आज भी दहेज की बलि चढ़ रहीं बेटियां, डराने वाले हैं मौत के आंकड़े

 Written By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : May 20, 2026 06:16 pm IST,  Updated : May 20, 2026 06:55 pm IST

आज हम खुद को सुसभ्य मानते हैं और आधुनिक समाज की दुहाई देते नहीं थकते। लेकिन इस समाज की कड़वी सच्चाई ये है कि आज भी दहेज के लिए बेटियां जान दे रहीं या उनकी जान ले ली जा रही है। दहेज के मामले और उससे होने वाली मौत के आंकड़े डराने वाले हैं।

ट्विशा और दीपिका नागर- India TV Hindi
ट्विशा और दीपिका नागर Image Source : FILE PHOTO

नोएडा में दीपिका नागर की मौत और भोपाल में ट्विशा शर्मा की मौत ने एक बार फिर से भारत में दहेज की कुप्रथा को उजागर किया है। भारत में दहेज से हुई बेटियों की मौत का मामला कोई नया नहीं है, इस कुप्रथा के कारण जानें कितनी ही बेटियों ने या तो मौत को गले लगा लिया, कभी जला दी गईं, कभी बेरहमी से मौत के घाट उतार दी गईं। आज हम चांद सितारों से आगे अब सूरज तक पहुंचने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन आज भी देश में कितनी ही बेटियां घर के किसी कोने में चुपचाप सिसक रही हैं, प्रताड़ना सह रही हैं। खामोशी से अपने आंसू छुपा ले रही हैं कि कहीं इसकी वजह से कलह ना हो, उनकी जान ना चली जाए, उनके माता पिता, भाई बहन पर कोई आंच ना आए। 

नोएडा की दीपिका नागर की मौत का मामला

पिछले दो साल में दहेज के कारण कई महिलाओं की मौत ने एक बार फिर सोचने को मजबूर कर दिया है कि बेटियां आखिर कबतक दहेज की बलि चढ़ती रहेंगी। नोएडा की दीपिका नागर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर ने एकदम से चौंका दिया, जिसमें ससुराल पक्ष पर दहेज हत्या के गंभीर आरोप लगे हैं। उसके परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई है कि विवाह के पश्चात दहेज की निरंतर मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर दीपिका को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। 

भारत में दहेज प्रथा
Image Source : INDIATVभारत में दहेज प्रथा

दूसरी खबर, भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के बाद उसके पिता नवनिधि शर्मा ने अपने दामाद, ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उसकी रिटायर्ड जज सास पर दहेज के प्रताड़ना और दहेज मांगने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं ट्विशा के ससुराल पक्ष का दावा है कि उसने ख़ुदकुशी की है। ट्विशा के व्हाट्सऐप चैट्स से खुलासा हुआ है कि उसने अपने परिवार से कई बार ससुराल पक्ष और पति समर्थ सिंह द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी।

दीपिका और ट्विशा की शादी मौत से कुछ ही महीने पहले हुई थी। दहेज हत्या के इन मामलों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। दोनों महिलाओं के परिवार का आरोप है कि उन्हें लगातार दहेज के लिए मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था। दहेज से संबंधित मौत की ये खबरें सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि आज के आधुनिक समाज का खोखला और भयावह चेहरा हैं, जिसके पीछे एक लड़की की शादी और भविष्य के सपनों की मौत है। ऐसे मां-बाप के सपनों की मौत है जिन्होंने बड़े अरमान से कभी अपनी बेटी की धूमधाम से संपन्न घर में शादी की, बेटी को विदा किया, लेकिन दहेज लोभियों के घर में बेटी ब्याह कर उसी बेटी की लाश के सामने खड़े होकर खुद से सवाल पूछते हैं कि आखिर हमारी गलती क्या थी।

ट्विशा शर्मा की मौत
Image Source : INDIATVट्विशा शर्मा की मौत

दहेज के लिए होने वाली इन हत्या की खबरों ने उन परिवार वालों में भय पैदा कर दिया है जिन घरों में बेटियां हैं। भारत में छह दशक पहले दहेज विरोधी सख्त कानून बनाया गया, लेकिन हालात आज भी ऐसे हैं कि हर साल हजारों महिलाएं दहेज के कारण प्रताड़ना, हिंसा और मौत का शिकार होती हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली लगातार पांचवें साल देश के महानगरों में दहेज मौत के मामलों में सबसे ऊपर रही। साल 2024 में दिल्ली में 109 दहेज हत्या के मामले दर्ज हुए, जिनमें 111 महिलाओं की जान गई। वहीं, बेंगलुरु दहेज प्रताड़ना का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा, जहां महानगरों में दर्ज 1,008 मामलों में से 878 मामले अकेले बेंगलुरु से थे।

देशभर के आंकड़े और भी ज्यादा डराने वाले हैं। NCRB के “क्राइम इन इंडिया 2023” के अनुसार, पूरे भारत में दहेज से जुड़े 15,489 मामले दर्ज हुए, जबकि 6,156 महिलाओं की मौत दहेज हिंसा के कारण हुई। यानी हर दिन करीब 17 से 18 महिलाएं दहेज की वजह से मारी गईं। आसान शब्दों में कहें तो भारत में लगभग हर 84 मिनट में एक महिला दहेज के कारण अपनी जान गंवा रही है।

दहेज के मामले
Image Source : PTIदहेज के मामले

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 7,151 मामले दर्ज हुए, जबकि बिहार में 3,665 मामले सामने आए। दहेज मौत के मामलों में उत्तर प्रदेश में 2,122 महिलाओं की मौत हुई, जबकि बिहार में 1,143 महिलाओं ने जान गंवाई। वहीं 83 हजार से ज्यादा दहेज मामले अब भी अदालतों में लंबित पड़े हैं, जो दिखाता है कि पीड़ित परिवारों को इंसाफ पाने के लिए कितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है।ये तो सिर्फ दर्ज हुए मामले हैं, लेकिन असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। क्योंकि हजारों महिलाएं आज भी शादी के बाद चुपचाप खुद पर हो रहे अत्याचार को सह रही हैं। कई परिवार सामाजिक बदनामी, आर्थिक मजबूरी या समाज के डर से शिकायत तक दर्ज नहीं कराते और बेटियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।

दहेज के मामले
Image Source : PTIदहेज के मामले

हमारे देश में कहीं एक पिता बेटी की शादी के लिए जमीन बेच देता हैं, मां अपने गहने गिरवी रख देती है। लेकिन दहेज दानवों का पेट भरने के लिए उन्हें खुद को बेचना शेष रह जाता है। ऐसे मां बाप की बेटियां रो रोकर बताती हैं कि उसे पैसे, सामान लाने के लिए ताने दिए जा रहे हैं, पीटा जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है। लेकिन मजबूर मां बाप अपनी बेटियों के लिए कुछ नहीं कर पाते। कुछ समय बाद बेटियों की आवाज को दबा दिया जाता है तो कहीं हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है।  

भारत में दहेज अपराधों के खिलाफ कानून बनाने से कुछ नहीं होगा, समाज को भी इस कुरीति को खत्म करने के लिए सख्ती बरतनी होगी। क्योंकि हमारा समाज खुद ही इस बुराई को, इस बुराई की वजह से होने वाली मौतों को सामान्य मान चुका है। आज भी बिहार, यूपी जैसे राज्यों में कई परिवार लड़के की नौकरी, सैलरी, विदेश में रहने या सरकारी पद के आधार पर उसका दहेज यानी उसका “रेट” तय करते हैं।

भारत में दहेज प्रथा
Image Source : INDIATVभारत में दहेज प्रथा

डॉक्टर, इंजीनियर, अफसर और एनआरआई लड़कों को शादी की कीमत तय की जाती है, जैसे वह बाजार में बिकने वाली कोई वस्तु हो। हमारे सभ्य समाज का दोगलापन ये है कि कई पढ़े-लिखे परिवार, जो घर के बाहर महिलाओं के अधिकारों की बढ़ चढ़कर बात करते हैं, लेकिन वही परिवार घर के भीतर बंद कमरों में दहेज की बड़ी डील करते हैं। ऐसे कई मामले हैं जिनकी खबरों से इन्हें कोई लेना देना नहीं होता, शायद आप भी टीवी, समाचार पत्र या किसी वेबसाइट, या अपने मोबाइल के ऐप पर आने के बाद भूल गए होंगे, लेकिन उन बेटियों की आह अब भी गूंज रही है।

दहेज के कुछ मामले 

बरेली के थाना फरीदपुर क्षेत्र में दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर गर्भवती बहू को प्रताड़ित कर घर से निकालने का सनसनीखेज सामने आया था। वैगनआर कार की मांग पूरी नहीं होने पर ससुराल वालों ने 6 माह की गर्भवती महिला को मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया। वहीं, सुभाषनगर में, बुलेट बाइक नहीं मिलने पर ससुरालियों द्वारा गर्भवती बहू को कथित तौर पर जबरन तेजाब पिलाया गया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पति सहित ससुराल पक्ष पर केस दर्ज किया।

दहेज की कुप्रथा
Image Source : INDIATVदहेज की कुप्रथा

दिल्ली पुलिस की स्वैट कमांडो की दहेज के कारण पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उसके भाई निखिल ने बताया, मुझे एक फोन आया। मैंने अपनी बहन की चीखें सुनीं। फिर, उसके पांच मिनट बाद, मुझे अपने जीजा का दूसरा फोन आया, जिसमें उन्होंने बताया कि उसकी मौत हो गई है। उसने आगे बताया मेरे जीजा के माता-पिता, भाई और बहन कहते थे कि उन्हें ज़्यादा दहेज मिलना चाहिए था। शुरू में सब ठीक था, लेकिन बाद में उसका व्यवहार फिर से वैसा ही हो गया। वह ब्रेन डेड हो चुकी थी। डॉक्टरों ने कहा कि उसका इलाज संभव नहीं है।

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