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क्या है 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम? जिसे वापस ले रही दिल्ली सरकार, 8 दिन पहले ही जारी हुआ था नया ड्राफ्ट

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jun 04, 2026 01:35 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 02:01 pm IST

'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम कांग्रेस की शीला दीक्षित सरकार ने लागू की थी। हालांकि, लंबे समय तक यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही और बेहद कम लोगों ने अपने घरों को होम स्टे में बदला था। हालांकि, सरकार इसे नए सिरे से लागू करना चाहती थी। अब इसे बंद करने का फैसला लिया गया है।

B and B policy- India TV Hindi
दिल्ली से खत्म होगी बीएंडबी पॉलिसी Image Source : INDIA TV

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार सुबह 'फ्लरिश स्टे बीएंडबी' में भीषण आग लग गई थी। इस घटना में 21 लोगों की मौत हो गई। वहीं, कई अन्य घायल हैं, जिनका इलाज जारी है। इस घटना में मौतों का आंकड़ा बढ़ने के आसार हैं। जिस होटल में आग लगी थी। वह बीएंडबी स्कीम के तहत चल रहा था। यहां हम बताएंगे कि यह योजना किसने शुरू की और सरकार इसमें क्या बदलाव करने जा रही थी।

क्या है 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम?

'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम के तहत दिल्ली में रहने वाले लोगों को अपने घर में ही लोगों को किराए पर कमरा देने का विकल्प मिलता है। ऐसे में लोगों को अच्छे घर कम कीमत पर मिल जाते हैं। हालांकि, कोई भी व्यक्ति अपने घर को बीएनबी तभी बना सकता था, जब उसने सरकार से विभिन्न तरह की अनुमति ली हों। बीएनबी में लोग अपने घर का एक या ज्यादा कमरे अन्य लोगों को किराए पर दे सकते हैं।

2007 में शुरू हुई थी स्कीम

'बेड एंड ब्रेकफास्ट' स्कीम साल 2007 में शुरू हुई थी। इस समय दिल्ली में कांग्रेस की सरकार थी और शीला दीक्षित राज्य की मुख्यमंत्री थीं। हालांकि, उस समय यह स्कीम ज्यादा सार्थक नहीं रही। आने वाले दिनों में भी स्कीम लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही। अरविंद केजरीवाल की सरकार ने इस योजना पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार बनने के बाद इस योजना को नए सिरे से लागू करने की कोशिश शुरू हुई। साल 2023 तक इस योजना के तहत 432 घरों में 2,200 से अधिक कमरे पंजीकृत थे।

8 दिन पहले मिला था नया ड्राफ्ट

दिल्ली सरकार ने 26 मई को नया ड्राफ्ट जारी किया था, जिसमें पुरानी पॉलिसी में कई बदलाव किए गए थे। कमरों के आकार, साज-सज्जा, स्वच्छता, मेहमानों की सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों के आधार पर दो श्रेणियां गोल्ड और सिल्वर शुरू की गई थीं। इसमें अधिकतम आठ कमरों और 16 बिस्तरों तक की अनुमति देने का प्रस्ताव था। नाश्ता और ठहरने की सुविधा देने वाले घरों को कमरे के आकार, सुविधाओं, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों के आधार पर बांटने की योजना थी। गोल्ड श्रेणी के लिए कमरों का न्यूनतम आकार 120 वर्ग फुट और बेहतर सुविधाएं अनिवार्य थीं, जबकि सिल्वर श्रेणी में 100 वर्ग फुट के कमरे और बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त थीं। मसौदे में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई थी। सभी बीएंडबी इकाइयों के लिए गेस्ट रजिस्टर रखना, पुलिस वेरिफिकेशन कराना और विदेशी मेहमानों से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य होगा। इसके अलावा, आग बुझाने का उपकरण, प्राथमिक उपचार किट और आपात स्थिति में संपर्क रखना जरूरी था। सीसीटीवी कैमरों को केवल प्रवेश द्वार और सामान्य क्षेत्रों तक सीमित रखने का प्रस्ताव था। 

नए ड्राफ्ट में जरूरी थीं ये चीजें

नए ड्राफ्ट में कमरों और कॉमन एरिया की नियमित सफाई, कचरे को अलग-अलग फेंकना और पर्याप्त खुली हवा सुनिश्चित करनी जरूरी थी। परिसर में मालिक या केयरटेकर की उपलब्धता भी अनिवार्य थी। केवल आवासीय संपत्तियों को ही बीएंडबी योजना के दायरे में रखा गया था और इन इकाइयों में रेस्टोरेंट, बार या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं थी। इस नीति से सस्ते और स्थानीय अनुभव वाले ठहराव को बढ़ावा मिलने और निवासियों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने की योजना थी। इस मसौदे पर हितधारकों एवं आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे गए थे। अब इसे वापस लेने की बात कही गई है।

पर्यटन मंत्री ने दी जानकारी

पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, "हम आधिकारिक तौर पर 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' योजना को वापस लेने जा रहे हैं और इसके तहत लाइसेंस प्राप्त सभी प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी।" मंत्री ने कहा, "लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने वाले संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि इस योजना के तहत पंजीकृत कोई भी प्रतिष्ठान छह से अधिक कमरे संचालित करते हुए पाया गया, तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।" मिश्रा के अनुसार, 'फ्लरिश स्टे' को 2024 में बीएंडबी योजना के तहत सिल्वर श्रेणी में छह कमरों के लिए लाइसेंस दिया गया था, जिसकी वैधता 2027 तक थी। हालांकि, जांचकर्ताओं ने बताया कि यह होटल कथित तौर पर अपनी स्वीकृत क्षमता से लगभग चार गुना अधिक कमरे संचालित कर रहा था और उसके पास अनिवार्य अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी नहीं था।

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