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क्यों जरूरी था योगी कैबिनेट का विस्तार, मंत्री के लिए किस आधार पर हुआ किस नेता का चुनाव? समझें सियासी समीकरण

 Reported By: Ruchi Kumar, Edited By: Niraj Kumar
 Published : May 10, 2026 09:47 pm IST,  Updated : May 10, 2026 10:15 pm IST

2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी कैबिनेट विस्तार एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। बीजेपी ने इस विस्तार के जरिए जातीय, क्षेत्रीय और संगठनात्मक संतुलन साधने की कोशिश की है।

Yogi cabinet expansion- India TV Hindi
योगी कैबिनेट का विस्तार Image Source : PTI

लखनऊ: यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार का आज विस्तार हो गया। लखनऊ के 'जनभवन' में हुए शपथ ग्रहण समारोह में आठ मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें छह नए मंत्री बनाये गए और मौजूदा सरकार के दो मंत्रियों का प्रमोशन हुआ। आज भूपेंद्र चौधरी,मनोज पांडेय ने कैबिनेट मंत्री की शपथ ली। कृष्णा  पासवान, सुरेन्द्र दिलेर ,हंसराज विश्वकर्मा, कैलाश सिंह राजपूत ने राज्य मंत्री पद की शपथ ली। अजित पाल और सोमेंद्र तोमर ने राज्य मंत्री स्वतन्त्र प्रभार की शपथ ली ,अभी ये दोनों राज्य मंत्री थे लेकिन स्वतन्त्र प्रभार नहीं था।

कैबिनेट विस्तार बड़ा सियासी संदेश!

यूपी में अचानक हुए इस कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी चर्चाएं गर्म हैं। दरअसल, यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव है और बीजेपी ने उसे देखते ही कैबिनेट का विस्तार किया है। कैबिनेट विस्तार केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि बड़ा सियासी संदेश है। इस विस्तार के ज़रिए बीजेपी ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश की है। इसे समाजवादी पार्टी के फॉर्मूले को टक्कर देने की कोशिश मानी जा रही है।

किन चेहरों को मिली प्राथमिकता?

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक पार्टी ने कैबिनेट में उन चेहरों को प्राथमिकता दी है, जिनकी अपने क्षेत्र और समाज में मजबूत पकड़ है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी जैसे क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देकर बीजेपी ने चुनावी समीकरण मजबूत करने का प्रयास किया है।

Yogi cabinet
Image Source : PTIनए मंत्रियों को शपथ दिलातीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव का पीडीए फार्मूला यानि पिछड़ा,दलित और अल्पसंख्यक फार्मूला कामयाब हुआ और इंडिया गठबंधन ने 43 सीटें जीत ली। अकेले समाजवादी पार्टी ने 37 सीट जीती और बीजेपी सिर्फ 33 सीट जीत पाई। वहीं बीजेपी के सहयोगी दल तीन सीटें जीतने में कामयाब रहे। बीजेपी से दलित और पिछड़ा वोट खिसक गया। लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए को दलितों में जाटवों का 24 फीसदी और ग़ैर जाटवों का 29 फीसदी वोट मिला। इंडिया गठबंधन को दलितों में जाटवों का 25 फीसदी और ग़ैर जाटवों का 56 फीसदी वोट मिला ।

पिछड़े और दलित का खास ध्यान रखा गया

आज के कैबिनेट विस्तार में पिछड़े और दलित का खास ध्यान रखा गया, तीन पिछड़े और दो दलित मंत्री बनाये गए। हाल के दिनों में ब्राह्मण समाज की बीजेपी से नाराजगी दिखी। खासतौर से यूजीसी,शंकराचार्य विवाद और घूसखोर पंडित फिल्म को लेकर ब्राह्मण बीजेपी से नाराज़ दिख रहे थे। आज मनोज पांडेय को कैबिनेट में जगह दी गई। मनोज पांडेय रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक हैं। वे तीन बार विधायक रह चुके हैं। मनोज पांडेय पहले समाजवादी पार्टी में विधान सभा में सचेतक की भूमिका में थे। लेकिन राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने क्रॉस वोटिंग की जिसके चलते जून 2025 में उन्हें समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

भूपेंद्र चौधरी

भूपेंद्र चौधरी उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं। 2016 में वे पहली बार एमएलसी नामित हुए थे। वे वर्ष 2017 में वे योगी कैबिनेट में पंचायत राज मंत्री बनाए गए। मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र चौधरी की पहचान एक जाट नेता के तौर पर रही है। विश्व हिंदू परिषद में छात्र नेता के तौर पर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया था और 1991 में बीजेपी में शामिल हो गए। 

Yogi cabinet expansion
Image Source : PTI'जन भवन' में राज्यपाल ने दिलाई नए मंत्रियों को शपथ

कृष्णा पासवान 

राज्य मंत्री बनी कृष्णा पासवान  दलित समुदाय से आती हैं। वह फतेहपुर की खागा से चार बार की बीजेपी विधायक हैं। राजनीति में आने से पहले वह आंगनबाड़ी में भी काम कर चुकी हैं। बीजेपी ने मंत्री बनाकर दलित और महिला प्रतिनिधित्व को मजबूत करने का संकेत तो दिया ही साथ ही बुंदेलखंड और फतेहपुर के इलाके में संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी इसे माना जा रहा है।

सुरेंद्र दिलेर

सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ के खैर से विधायक है। वे वाल्मिकी समाज से आते हैं। बीजेपी संगठन के जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ताओं में इनकी गिनती होती है। आगरा मंडल और पश्चिमी यूपी में इनकी पकड़ मजबूत है। सुरेंद्र दिलेर के बाबा किशन लाल दिलेर 6 बार विधायक और 4 बार सांसद रहे। इनके पिता राजवीर सिंह दिलेर 1 बार सांसद 1 बार विधायक रह चुके हैं। बीजेपी दलित समुदाय में अपनी पकड़ और मजबूत बनाना चाहती है ऐसे में सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाकर पार्टी ने जाटव और अन्य अनुसूचित जाति समुदायों को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।

हंसराज विश्वकर्मा 

यूपी की राजनीति में ओबीसी समाज और खास तौर से विश्वकर्मा समुदाय के प्रमुख चेहरों में इनकी गिनती होती है। वाराणसी के रहनेवाले हंसराज विश्वकर्मा एमएलसी हैं। ये वाराणसी बीजेपी के जिलाध्यक्ष हैं। इन्हें मंत्री बनाकर पार्टी ने पूर्वांचल में सामाजिक समीकरण मजबूत करने की कोशिश की है। इनकी पहचान संगठन में लंबे समय से सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर रही है।

कैलाश राजपूत

कैलाश राजपूत कन्नौज से आते हैं। इन्हें मंत्री बनाकर पार्टी  ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। कैलाश राजपूत संगठन और चुनावी राजनीति में लंबे से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। पार्टी के भरोसेमंद चेहरों में इनकी गिनती होती है।

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