Published : Mar 07, 2026 10:44 pm IST, Updated : Mar 07, 2026 10:45 pm IST
1/5Image Source : IndiaTV
दिल्ली में स्थित कई पुरानी सरकारी कॉलोनियों का चेहरा अब पूरी तरह बदलने वाला है। केंद्र सरकार ने राजधानी की 7 प्रमुख सरकारी आवासीय कॉलोनियों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए एक बड़ा रीडेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। सरकार एक खास सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल के जरिए इस योजना को पूरा करेगी, जिससे सरकारी बजट पर कोई एक्स्ट्रा बोझ नहीं पड़ेगा।
2/5Image Source : IndiaTV
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पुराने और जर्जर हो चुके सरकारी क्वार्टरों की जगह आधुनिक हाई-राइज इमारतें बनाई जाएंगी, जिससे हजारों सरकारी कर्मचारियों को बेहतर आवास मिल सकेगा। सरकार जिन 7 कॉलोनियों को नए रूप में विकसित करने जा रही है, उनमें सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, नौरोजी नगर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर, श्रीनिवासपुरी और मोहम्मदपुर शामिल हैं। ये सभी कॉलोनियां करीब 537 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं और इनमें बने कई सरकारी मकान अब काफी पुराने हो चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कॉलोनियों के लगभग 40% घर रहने लायक नहीं रह गए थे, जिससे कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
3/5Image Source : IndiaTV
रीडेवलपमेंट योजना के तहत पुराने लो-राइज क्वार्टरों की जगह आधुनिक हाई-राइज रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद यहां 21,000 से ज्यादा नए फ्लैट तैयार होंगे। इन फ्लैटों में बेहतर सड़कें, पार्किंग, हरियाली, स्कूल, कम्युनिटी सेंटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास की कमी भी काफी हद तक दूर हो सकेगी।
4/5Image Source : IndiaTV
इस योजना के तहत 8 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगभग 2,722 नए फ्लैटों का उद्घाटन करेंगे। साथ ही करीब 6,632 नए फ्लैटों की आधारशिला भी रखी जाएगी। यह फ्लैट जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) रीडेवलपमेंट प्लान के तहत तैयार किए जा रहे हैं।
5/5Image Source : IndiaTV
इस योजना की सबसे खास बात इसका सेल्फ-फाइनेंसिंग मॉडल है। सरकार ने कुल जमीन का केवल 69.41 एकड़ यानी करीब 12.9% हिस्सा व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए विकसित करने का फैसला किया है। इस जमीन के व्यावसायिक उपयोग से सरकार को लगभग ₹35,100 करोड़ की आय होने का अनुमान है, जबकि पूरे रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की लागत करीब ₹32,800 करोड़ है। यानी यह प्रोजेक्ट न सिर्फ बिना टैक्सपेयर्स के पैसे के पूरा होगा, बल्कि सरकार को करीब ₹2,300 करोड़ का अतिरिक्त लाभ भी मिल सकता है।