Published : May 04, 2025 09:29 pm IST, Updated : May 04, 2025 09:29 pm IST
1/6Image Source : Instagram
साल 1988 में दिसंबर की 6 तारीख को पंजाब में फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग चल रही थी। इस शूटिंग सेट पर 40 साल का एक्टर अपने शॉट का इंतजार कर रहा था। लेकिन इसी दौरान कुछ गुंडों ने अचानक हमला बोल दिया और धड़ाधड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस फायरिंग में 40 साल के एक्टर की मौत हो गई। इस एक्टर को पंजाब का धर्मेंद्र कहा जाता था। इतना ही नहीं इनके भाई बॉलीवुड में भी सुपरस्टार थे। लेकिन एक्टर की इस मौत की कहानी आज भी लोगों के जहन से नहीं उतरी है। हम बात कर रहे हैं धर्मेंद्र के भाई वीरेंद्र सिंह की।
2/6Image Source : Instagram
सुभाष धाड़वाल, जिन्हें वीरेंद्र सिंह के नाम से जाना जाता है दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के सबसे करीबी चचेरे भाइयों में से एक थे। अगर वीरेंद्र आज हमारे बीच होते तो किसी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं होते। बता दें कि धर्मेंद्र के चचेरे भाई ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1975 की पंजाबी फिल्म तेरी मेरी एक जिंदरी से की थी। जिसमें उन्होंने वीरेंद्र के भाई की भूमिका निभाई थी। इसके बाद उन्हें बटवारा, लंभरदारनी, बलबीरो भाभी, दुश्मनी दी अग्ग और अन्य जैसी लोकप्रिय पंजाबी फिल्मों में भी देखा गया। बाद में वीरेंद्र ने हिंदी फिल्म उद्योग में भी कदम रखा और खेल मुकद्दर का और दो चेहरे जैसी फिल्मों में काम किया जो दोनों ही सफल रहीं। उनके पेशेवर जीवन के बारे में बात करें तो एक प्रमुख अभिनेता होने के अलावा, वह एक सफल निर्देशक और निर्माता भी थे। अपने 12 साल के फिल्मी करियर में उन्होंने लगभग 25 फिल्में बनाईं, जो सभी ब्लॉकबस्टर रहीं।
3/6Image Source : Instagram
पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार वीरेंद्र की बढ़ती लोकप्रियता कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई। साथ ही यह भी उल्लेखनीय है कि 1980 का दशक पंजाब के सबसे कठिन दौरों में से एक था और यह व्यापक उग्रवादी क्रांति की विशेषता थी। इस दौरान कवियों, लेखकों, अभिनेताओं और गायकों सहित कई कलाकारों को निशाना बनाया गया और चेतावनी दी गई कि यदि उनका काम विचारधारा से मेल नहीं खाता है और जो इसके खिलाफ जाता है उसे असमय स्वर्ग जाना पड़ता है। वीरेंदर का मामला भी कुछ ऐसा ही था।
4/6Image Source : Instagram
दिसंबर 1988 में लुधियाना के पास तलवंडी कलां सवाड्डी गांव में अपनी फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग के दौरान वीरेंदर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना अमर सिंह चमकीला की दुखद हत्या के कुछ ही महीनों बाद हुई थी। हालांकि अमर सिंह चमकीला की तरह ही वीरेंदर की मौत का मामला भी अनसुलझा ही रहा। उस समय वीरेंदर की उम्र 40 साल थी। कई स्रोतों का यह भी दावा है कि वीरेंदर की लोकप्रियता ही उनकी दुश्मन बन गई और उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन कुछ का कहना है कि वे आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हुए।
5/6Image Source : Instagram
वीरेंद्र सिंह को उनके प्रशंसक भाषी भी कहते थे। 1980 के दशक में इंडस्ट्री पर राज करने वाले सनसनीखेज पंजाबी फिल्म अभिनेता और निर्देशक अपने परिवार के बेहद करीब थे। इसलिए, उनकी असामयिक मौत के पीछे के कुछ रहस्यों को उजागर करने के लिए उनके बेटे रणदीप आर्य कथित तौर पर उनके जीवन पर एक फिल्म बना रहे हैं।
6/6Image Source : Instagram
रिपोर्ट्स के मुताबिक वीरेंद्र पर बनने वाली बायोपिक उनकी हत्या के पीछे की साजिश को उजागर करेगी। हालांकि इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। लेकिन ये बात कम ही लोग जानते हैं कि वीरेंद्र सिंह को पंजाब का धर्मेंद्र भी कहा जाता था।