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सर्दियों में बढ़ जाती है गले में खराश और सर्दी ज़ुकाम की परेशानी, एक्सपर्ट से जानें ऐसा क्यों होता है?

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jan 15, 2026 04:34 pm IST,  Updated : Jan 15, 2026 04:34 pm IST
सर्दियों के मौसम में कान, नाक और गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाना एक आम बात है। ठंडी हवा, कम तापमान और वातावरण में नमी की कमी इन अंगों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। जैसे ही ठंड बढ़ती है, शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। MedFirst ENT Centre में कंसल्टेंट डॉ. राजेश भारद्वाज, बता रहे हैं कि ऐसा क्यों होता है?
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सर्दियों के मौसम में कान, नाक और गले से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाना एक आम बात है। ठंडी हवा, कम तापमान और वातावरण में नमी की कमी इन अंगों को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। जैसे ही ठंड बढ़ती है, शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। MedFirst ENT Centre में कंसल्टेंट डॉ. राजेश भारद्वाज, बता रहे हैं कि ऐसा क्यों होता है?
ठंड के मौसम में हवा शुष्क हो जाती है, जिससे नाक और गले की अंदरूनी परत सूखने लगती है। यह परत सामान्य तौर पर वायरस और बैक्टीरिया को रोकने का काम करती है, लेकिन जब यह सूख जाती है तो कीटाणु आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसी वजह से सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी और साइनस की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
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ठंड के मौसम में हवा शुष्क हो जाती है, जिससे नाक और गले की अंदरूनी परत सूखने लगती है। यह परत सामान्य तौर पर वायरस और बैक्टीरिया को रोकने का काम करती है, लेकिन जब यह सूख जाती है तो कीटाणु आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसी वजह से सर्दी-जुकाम, गले में खराश, खांसी और साइनस की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।
सर्दियों में लोग अधिकतर बंद कमरों में रहते हैं और धूप में कम निकलते हैं। इससे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। साथ ही ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनने के बावजूद ठंडी हवा सीधे कानों और नाक को प्रभावित करती है, जिससे कान में दर्द, जकड़न या इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
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सर्दियों में लोग अधिकतर बंद कमरों में रहते हैं और धूप में कम निकलते हैं। इससे एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। साथ ही ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े पहनने के बावजूद ठंडी हवा सीधे कानों और नाक को प्रभावित करती है, जिससे कान में दर्द, जकड़न या इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।
ठंड के कारण शरीर में रक्त संचार थोड़ा धीमा हो जाता है, जिसका असर कान-नाक-गले की इम्यून प्रतिक्रिया पर भी पड़ता है। इसके अलावा सर्दियों में पानी कम पीना और भाप या गर्म तरल पदार्थों का सही मात्रा में सेवन न करना भी इन समस्याओं को बढ़ा सकता है। धूल, धुआं और प्रदूषण भी इस मौसम में सांस की नली को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
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ठंड के कारण शरीर में रक्त संचार थोड़ा धीमा हो जाता है, जिसका असर कान-नाक-गले की इम्यून प्रतिक्रिया पर भी पड़ता है। इसके अलावा सर्दियों में पानी कम पीना और भाप या गर्म तरल पदार्थों का सही मात्रा में सेवन न करना भी इन समस्याओं को बढ़ा सकता है। धूल, धुआं और प्रदूषण भी इस मौसम में सांस की नली को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।
इन समस्याओं से बचने के लिए सर्दियों में पर्याप्त पानी पीना, गुनगुने तरल पदार्थों का सेवन करना, कानों और गले को ठंडी हवा से बचाना और साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। यदि बार-बार कान, नाक या गले की समस्या हो रही हो या दर्द और बुखार जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
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इन समस्याओं से बचने के लिए सर्दियों में पर्याप्त पानी पीना, गुनगुने तरल पदार्थों का सेवन करना, कानों और गले को ठंडी हवा से बचाना और साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। यदि बार-बार कान, नाक या गले की समस्या हो रही हो या दर्द और बुखार जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
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