Written By: Rituraj Tripathi@riturajfbd
Published : Jul 01, 2025 05:16 pm IST, Updated : Jul 01, 2025 05:17 pm IST
Image Source : PTI
दलाई लामा तिब्बत के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु हैं। उनका जन्म 6 जुलाई 1935 में उत्तरी तिब्बत में आमदो के एक छोटे गांव तकछेर में एक कृषक परिवार में हुआ था।
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बचपन में उनका मूल नाम ल्हामो दोंडुब (Lhamo Thondup) था। उन्हें तेरहवें दलाई लामा थुबतेन ग्यात्सो के अवतार के रूप में पहचान मिली है।
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दलाई लामा का असली नाम तेनज़िन ग्यात्सो (Tenzin Gyatso) है। वे 14वें दलाई लामा हैं।
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उनकी शिक्षा तिब्बत में हुई। उन्होंने 6 साल की उम्र में मठीय शिक्षा ग्रहण करना शुरू किया। 1959 में जब वह 23 साल के थे, तब वह ल्हासा के जोखंग मंदिर में मोनलम (प्रार्थना) उत्सव के समय अपनी अंतिम परीक्षा में बैठे थे।
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परीक्षा में सफल होने पर उन्हें गेशे ल्हारम्पा की उपाधि मिली। जो बौद्ध दर्शन में डॉक्टर के समकक्ष है और उच्चतम उपाधि है।
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चीन ने जब 1949 में तिब्बत पर आक्रमण किया तो 1950 में तेनज़िन ग्यात्सो से पूरी राजनैतिक सत्ता संभालने की अपील की गई।
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1954 में वे शांति वार्ता के लिए चीन के बीजिंग भी गए। लेकिन 1959 में चीनी सेना ने ल्हासा के तिब्बती राष्ट्रीय संघर्ष को बड़ी क्रूरता से कुचल दिया। इसके बाद तेनज़िन ग्यात्सो ने उत्तरी भारत के धर्मशाला में शरण ली और वह यहीं निवास करते हैं।
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दलाई लामा शांति प्रिय व्यक्ति हैं। 1989 में तिब्बत को स्वतंत्र कराने में उनके अहिंसात्मक संघर्ष के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।