Published : Sep 16, 2025 11:10 pm IST, Updated : Sep 16, 2025 11:10 pm IST
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एलेक्जेंडर हेमिल्टन ने अपनी किताब में लिखा है, औरंगजेब के डर से अंग्रेज भी थर-थर कांपते थे। कुछ ने तो डर के मारे इस्लाम भी कबूल कर लिया था।
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लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी के अध्यक्ष जोजाया चाइल्ड को मंजूर नहीं था कि कोई और उनके मुनाफे का हिस्सेदार बने। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वह मुगल जहाजों का रास्ता काट दें और उनके जहाजों को लूट लें।
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चाइल्ड की घोषणा के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के सिपाहियों ने मुगलों के कुछ जहाज लूट लिए। इसके बाद मुगलों के मंत्री अलबहर सीदी याकूत ने एक ताकतवर समुद्री जहाज से बम्बई तट की घेराबंदी कर दी।
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हेमिल्टन ने लिखा, 'सीदी 20 हजार सिपाही लेकर पहुंच गया और आधी रात को तोप से गोले दागकर सलामी दी, जिसके बाद अंग्रेजों ने भागकर किले में पनाह ले ली।'
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सीदी याकूत ने किले के बाहर ईस्ट इंडिया कंपनी के इलाके लूट लिए और मुगलों के झंडे गाड़ दिए। जो सिपाही लड़ने के लिए गए उनके गले काट दिए गए और बाकियों को गले में जंजीरें पहनाकर बम्बई की गलियों से गुजारा गया।
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14 महीने तक सीदी याकूत ने किले की घेराबंदी करे रखी। कंपनी के कुछ कर्मचारी चुपके से भाग निकले, इनमें से कुछ धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बन गए। औरंगजेब ने इस शर्त पर उनकी माफी कबूल की कि अंग्रेज मुगलों से जंग लड़ने का डेढ़ लाख रुपये हर्जाना देंगे।