प्रमोद महाजन: BJP के पहले सत्ताकाल के मुख्य सेनापति, जिनकी स्क्रिप्ट का अहम किरदार थे नरेंद्र मोदी
प्रमोद महाजन: BJP के पहले सत्ताकाल के मुख्य सेनापति, जिनकी स्क्रिप्ट का अहम किरदार थे नरेंद्र मोदी
भारतीय राजनीति में समय-समय पर एक से एक पुरोधा हुए हैं जिन्होंने भारतीय राजनीति की दिशा बदलने का काम किया है। आज के लोग अमित शाह को भारतीय राजनीति के चाणक्य के रूप में जानते हैं लेकिन आपको बता दें इनसे पहले भाजपा के चाणक्य कहे जाते थे प्रमोद महाजन। महाजन देश की राजनीतिक नब्ज को पहचानने वाले नेता थे।
Published : Oct 30, 2024 12:09 pm IST, Updated : Oct 30, 2024 12:12 pm IST
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आज के लोग अमित शाह को भारतीय राजनीति के चाणक्य के रूप में जानते हैं लेकिन आपको बता दें इनसे पहले भाजपा के चाणक्य कहे जाते थे प्रमोद महाजन।
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प्रमोद महाजन देश की राजनीतिक नब्ज को पहचानने वाले नेता थे। वह एक शानदार वक्ता थे जो सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। वाजपेयी काल में उनकी तूती बोलती थी।
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आज प्रमोद महाजन का जन्मदिन है। आइए जानते हैं बीजेपी के पहले सत्ताकाल में इसके अहम सेनापति रहे इस शख्स को। प्रमोद वेंकटेशन महाजन का जन्म 30 अक्टूबर 1949 को तेलंगाना के महबूब नगर इलाके में एक देशहस्थ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। वह RSS में बचपन से ही सक्रिय थे।
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प्रमोद महाजन को भाजपा का हनुमान भी कहा जाता था। वह अटल बिहारी वाजपेयी की पसंद थे। प्रमोद महाजन के चाहने वाले आज भी कहते हैं कि प्रमोद महाजन जिंदा होते तो भारतीय राजनीति का परिदृश्य कुछ और ही होता।
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नेताओं के बारे में लोगों की यही धारणा थी कि उन्हें सीधा-सादा दिखना चाहिए, कुर्ता-पायजामा और चप्पल में दिखना चाहिए लेकिन महाजन इसके उलट थे। वह 'रे बैन' का चश्मा पहनते थे। मोबाइल फोन चलाते थे और स्टाइलिश कार से चलते थे।
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इस बात की जानकारी शायद बहुत कम लोगों को होगी कि नरेंद्र मोदी आज जिस ऊंचाई पर हैं, निसंदेह उनकी अपनी काबिलियत है लेकिन इसके पीछे रणनीतिक सोच प्रमोद महाजन की थी।
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दरअसल, भाजपा की राजनीति के पुरोधा लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या की सफल यात्रा के सूत्रधार नरेंद्र मोदी के प्रमोद महाजन भी मुरीद हो गए थे। उसी दौर में देश का भविष्य नरेंद्र मोदी के रूप में उन्होंने देख लिया था।
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प्रमोद महाजन 1986 में पहली बार संसद पहुंचे। बतौर राज्यसभा सांसद तब से लेकर मृत्यु तक वह राज्यसभा सांसद ही रहे सिर्फ दो साल को छोड़कर जब वह लोकसभा में थे।
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अटल बिहारी वाजपेयी की पहली 13 दिनी सरकार में प्रमोद महाजन ने बतौर रक्षा मंत्री शपथ ली थी।
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2004 के लोकसभा चुनावों की रणनीति का जिम्मा प्रमोद महाजन को दिया गया। फील गुड और इंडिया शाइनिंग के नारे अस्तित्व में आए। लेकिन पार्टी इन सबके बावजूद लोकसभा चुनाव हार गई. महाजन ने व्यक्तिगत तौर पर हार की जिम्मेदारी ली।
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22 अप्रैल 2006 को प्रमोद महाजन अपने मुंबई स्थित अपार्टमेंट में परिवार के साथ थे। तभी उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन ने अपनी पिस्टल से प्रमोद पर तीन गोलियां दागीं। उन्हें हिंदुजा अस्पताल ले जाया गया। 13 दिन के संघर्ष के बाद 3 मई 2006 को प्रमोद का निधन हो गया। 4 मई 2006 को मुंबई के दादर इलाके में स्थित मशहूर शिवाजी पार्क में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।