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Pradosh Vrat Puja Vidhi: 12 जून को रखा जाएगा शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jun 11, 2026 03:48 pm IST,  Updated : Jun 11, 2026 03:48 pm IST

Pradosh Vrat Puja Vidhi: प्रदोष व्रत शिव जी को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव पूजा करने पर सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्त होती है। जानिए प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

Pradosh vrat- India TV Hindi
प्रदोष व्रत पूजा विधि और शुभ मुहूर्त Image Source : INDIA TV

Pradosh Vrat Puja Vidhi: प्रदोष व्रत प्रत्येक माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। यह उपवास भगवान शिव को समर्पित है। इस साल ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत 12 जून को रखा जाएगा। शुक्रवार को तिथि पड़ने से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में की गई शिव आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जानिए शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि और शुभ मुहूर्त। 

क्या है प्रदोष व्रत का महत्व?

प्रदोष शब्द का अर्थ संध्याकाल या गोधूलि बेला से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव ने तांडव नृत्य किया था। इसलिए इस समय की गई पूजा को अत्यंत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से पापों का नाश होता है और आर्थिक परेशानियां कम होती हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 की शाम लगभग 7 बजकर 36 मिनट पर प्रारंभ होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में की जाएगी। पूजा का शुभ समय शाम 7 बजकर 36 मिनट से रात 9 बजकर 20 मिनट तक माना गया है। इस अवधि में शिव जी का अभिषेक और पूजा बहुत फलदायी मानी गई है।

ऐसे करें व्रत का संकल्प

व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर शिव जी और मां पार्वती की पूजा करके व्रत का संकल्प लें। दिनभर निर्जा या फलाहार अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपवास रखें। व्रत के दौरान शिव मंत्रों का जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • सूर्यास्त के समय दोबारा स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
  • अंत में शिव जी की आरती करें। 

पुरुषोत्तम मास में विष्णु पूजा का महत्व

इस बार व्रत पुरुषोत्तम मास में पड़ रहा है। इसलिए विष्णु जी और उनके आठवें अवतार श्रीकृष्ण की पूजा भी विशेष फलदायी मानी गई है। पूजा के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जाप करें। मान्यता है कि इस दिन शिव और विष्णु की आराधना से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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