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मुगल बादशाह औरंगजेब क्यों बुनता था टोपी, कितने में और कहां बिकती थी?

Malaika Imam Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1 Published : Sep 15, 2025 10:28 am IST, Updated : Sep 15, 2025 01:13 pm IST
  • फिल्म छावा में दिखाई गई है कि मुगल बादशाह औरंगजेब दरबार में बैठने के दौरान हाथ से कुछ बुनता रहता था। इतिहास की कई किताबों में इसका जिक्र भी है, लेकिन वह ऐसा क्यों करता था, आइए इसके बारे में जानते हैं।
    Image Source : lexica.art
    फिल्म छावा में दिखाई गई है कि मुगल बादशाह औरंगजेब दरबार में बैठने के दौरान हाथ से कुछ बुनता रहता था। इतिहास की कई किताबों में इसका जिक्र भी है, लेकिन वह ऐसा क्यों करता था, आइए इसके बारे में जानते हैं।
  • दरअसल, औरंगजेब अपनी निजी जिदंगी में अपने पूर्वजों से काफी अलग था। उसने अत्यधिक खर्च को कम करने के लिए दरबार में संगीत और उत्सवों पर पाबंदी लगाई थी। वह शारीरिक श्रम के जरिए अपनी आजीविका कमाने पर जोर देता था।
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    दरअसल, औरंगजेब अपनी निजी जिदंगी में अपने पूर्वजों से काफी अलग था। उसने अत्यधिक खर्च को कम करने के लिए दरबार में संगीत और उत्सवों पर पाबंदी लगाई थी। वह शारीरिक श्रम के जरिए अपनी आजीविका कमाने पर जोर देता था।
  • इतिहास की कई किताबों में इसका जिक्र है कि औरंगजेब ने अपना कुछ समय नमाज की टोपियां यानी तकियाह बुनने और हाथ से कुरान लिखने में बिताया करता था।
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    इतिहास की कई किताबों में इसका जिक्र है कि औरंगजेब ने अपना कुछ समय नमाज की टोपियां यानी तकियाह बुनने और हाथ से कुरान लिखने में बिताया करता था।
  • औरंगजेब अपने निजी खर्च के लिए शाही खजाने के इस्तेमाल के सख्त खिलाफ था। इसलिए, वह अपनी बुनी हुई टोपियों को बेचता था और इससे मिलने वाले धन का इस्तेमाल निजी खर्च के लिए करता था।
    Image Source : lexica.art
    औरंगजेब अपने निजी खर्च के लिए शाही खजाने के इस्तेमाल के सख्त खिलाफ था। इसलिए, वह अपनी बुनी हुई टोपियों को बेचता था और इससे मिलने वाले धन का इस्तेमाल निजी खर्च के लिए करता था।
  • हालांकि, औरंगजेब के रोजाना टोपी बुनने की आदत को इतिहासकार अलग-अलग नजरिए से देखते थे। कुछ का मानना है कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप औरंगजेब सादा जीवन जीने की परंपरा का पालन करता था।
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    हालांकि, औरंगजेब के रोजाना टोपी बुनने की आदत को इतिहासकार अलग-अलग नजरिए से देखते थे। कुछ का मानना है कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप औरंगजेब सादा जीवन जीने की परंपरा का पालन करता था।
  • वहीं, कुछ इतिहासकार का मानना था कि ऐसा कर औरंगजेब खुद को एक धर्मनिष्ठ और विनम्र शासक के रूप में पेश करना चाहता था।
    Image Source : lexica.art
    वहीं, कुछ इतिहासकार का मानना था कि ऐसा कर औरंगजेब खुद को एक धर्मनिष्ठ और विनम्र शासक के रूप में पेश करना चाहता था।
  • यह भी कहा जाता है कि वह इन कामों से जो पैसा कमाता था, उसका इस्तेमाल अपने अंतिम संस्कार के लिए करना चाहता था, ताकि उसकी कब्र भी शाही खजाने से न बने।
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    यह भी कहा जाता है कि वह इन कामों से जो पैसा कमाता था, उसका इस्तेमाल अपने अंतिम संस्कार के लिए करना चाहता था, ताकि उसकी कब्र भी शाही खजाने से न बने।
  • ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, औरंगजेब जो टोपियां बनाता था, वे मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए थीं, जो उन्हें नमाज के दौरान पहनते थे।
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    ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, औरंगजेब जो टोपियां बनाता था, वे मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए थीं, जो उन्हें नमाज के दौरान पहनते थे।
  • वहीं, औरंगजेब की बुनी टोपियों की कीमतों के बारे में सटीक जानकारी तो नहीं मिलती, लेकिन कुछ ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, औरंगजेब की बनाई एक टोपी की कीमत 14 चांदी के सिक्के और 12 आना हुआ करती थी।
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    वहीं, औरंगजेब की बुनी टोपियों की कीमतों के बारे में सटीक जानकारी तो नहीं मिलती, लेकिन कुछ ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, औरंगजेब की बनाई एक टोपी की कीमत 14 चांदी के सिक्के और 12 आना हुआ करती थी।
  • औरंगजेब की बनाई टोपियां कहां बिकती थीं, ये स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि उन्हें दरबार के बाहर या सामान्य बाजारों में बेचा जाता होगा।
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    औरंगजेब की बनाई टोपियां कहां बिकती थीं, ये स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है, लेकिन यह माना जाता है कि उन्हें दरबार के बाहर या सामान्य बाजारों में बेचा जाता होगा।