Published : Oct 18, 2026 03:02 pm IST, Updated : Oct 18, 2026 03:02 pm IST
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नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्या पूजन करने से देवी मां की खास कृपा प्राप्त होती हैं। इसके साथ ही देवी दुर्गा की कृपा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। नवरात्रि के अलावा साल के कई अन्य विशेष अवसरों पर कन्या पूजन का विधान है। न खास पर्वों और शुभ तिथियों पर कन्याओं को भोजन कराने से माता रानी की कृपा से धन-धान्य में बरकत होती है।
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धार्मिक तीर्थ की यात्रा के बाद भी कन्या पूजन का विधान है। खासतौर से वैष्णो देवी, नैना देवी या ज्वाला देवी जैसे सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन से वापस आने के बाद कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है।
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अगर किसी व्यक्ति की कोई मनोकामना पूरी होती है तब भी लोग कन्या पूजन करते हैं। कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेकर देवी मां को आभार व्यक्त किया जाता है।
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विवाह, गृह प्रवेश या फिर संतान के जन्म के बाद भी कन्या पूजन किया जाता है। इसके अलावा अन्य मांगलिक कार्यों को पूरा होने के बाद भी कन्या खिलाया जाता है। कन्याओं को मां दुर्गा का रूप माना जाता है और कन्या पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
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मासिक दुर्गाष्टमी में भी कन्या पूजन किया जाता है। बता दें कि हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है।