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हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिनों का अपना विशेष महत्व है और शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। शनिदेव को कर्मफल दाता कहा गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। ऐसी मान्यता है कि शनिवार के दिन श्रद्धा से पूजा, जप, तप और व्रत करने से कुंडली में मौजूद शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या, महादशा और वक्र दृष्टि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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शनिदेव का व्रत कब शुरू करें: शनिवार का व्रत शनि संबंधी कष्टों से मुक्ति पाने के लिए किसी भी समय श्रद्धा के साथ शुरू किया जा सकता है। मान्यताओं के अनुसार सावन माह में इस व्रत को प्रारंभ करने से इसका पुण्यफल कई गुना बढ़ जाता है। अगर सावन में यह संभव न हो, तो किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के शनिवार से व्रत की शुरुआत की जा सकती है। शनिवार का व्रत कम से कम 19 शनिवार तक करना चाहिए। अगर किसी कारणवश कोई व्रत छूट जाए या खंडित हो जाए, तो आगे के शनिवारों में उसे पूरा करना आवश्यक माना गया है।
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व्रत की संपूर्ण पूजा विधि: शनिवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शनिदेव के मंदिर जाएं। वहां सबसे पहले शनिदेव को प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शनिदेव का सरसों के तेल से अभिषेक करें। पूजा में नीले रंग के फूल, धूप-दीप, काला तिल, काली उड़द की दाल, शमी पत्र, काला वस्त्र, लौंग, काली इलायची और लोहे से संबंधित वस्तुएं अर्पित करें। इसके बाद शनिवार व्रत कथा का पाठ करें या सुनें और शनि मंत्र का जप करते हुए 7, 11 या 108 बार शनिदेव की परिक्रमा करें।
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शनिवार व्रत के प्रभावी उपाय: शनिवार के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार काला कंबल, काले जूते, काले वस्त्र और तेल का दान करना चाहिए। दिव्यांग और जरूरतमंद लोगों को अन्न और धन का दान विशेष फलदायी होता है। शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि स्तोत्र या शनि कवच का नियमित पाठ करना लाभदायक माना गया है।
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शनिवार व्रत के प्रभावी उपाय: शनिवार को शाम के समय आटे से बना चौमुखा दीपक सरसों के तेल से भरकर पीपल के वृक्ष के नीचे जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
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शनिवार व्रत के नियम: शनिवार व्रत करने वाले व्यक्ति को कभी किसी कर्मचारी, सेवक या कामगार को कष्ट नहीं देना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और नशे से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। कमजोर और गरीब व्यक्ति का अपमान करना वर्जित माना गया है। व्रत के दिन अन्न और अत्यधिक तीखे मसालों के सेवन से भी बचना चाहिए।
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शनिवार व्रत का उद्यापन: जब शनिवार व्रत का संकल्प पूरा हो जाए, तब स्नान-ध्यान के बाद योग्य पंडित से विधि-विधान से शनिदेव की पूजा और हवन करवाना चाहिए। उद्यापन के समय शनि से जुड़ी वस्तुओं का दान करें और ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा देकर विदा करें। व्रत के पारण में खिचड़ी और काली उड़द की दाल का सेवन किया जाता है।