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IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला पकड़ा गया, हरियाणा सरकार हुई शिकार, जानें पूरा मामला

 Reported By: Puneet Pareenja Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Feb 24, 2026 11:16 pm IST,  Updated : Feb 24, 2026 11:16 pm IST

चंडीगढ़ में IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला पकड़ा गया है। इसकी शिकार हरियाणा सरकार हुई है। हालांकि सीएम सैनी ने बताया कि सरकारी खातों से निकाले गए 556 करोड़ रुपए और उस पर ब्याज के 22 करोड़ रुपए सरकारी खातों में वापस आ चुके हैं।

IDFC First Bank - India TV Hindi
IDFC फर्स्ट बैंक Image Source : IDFC FIRST BANK/REPRESENTATIVE PIC

चंडीगढ़: चंडीगढ़ से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां प्राइवेट सेक्टर के IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का घोटाला पकड़ा गया है। इस घोटाले का शिकार हरियाणा की सरकार हुई है। असल में IDFC की चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के प्रदूषण, पंचायत विभाग, पंचकुला म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और कालका सिटी काउंसिल के अकाउंट हैं। हरियाणा सरकार के प्रदूषण विभाग ने एक खाता बंद करके, उसके पैसे एक सरकारी बैंक में ट्रांसफर करने को कहा लेकिन, जब IDFC बैंक ने पैसे ट्रांसफर किए, तो वो विभाग की बैलेंसशीट से कम थे।

जांच हुई तो पता चला कि कई और सरकारी खातों से भी ऐसे ही पैसे निकाल लिए गए हैं। जितने पैसे सरकार की बैलेंस शीट में दर्ज थे। उससे कम रकम बैंक अकाउंट्स में थी। हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों और कॉरपोरेशंस के चार अकाउंट्स से 590 करोड़ रुपयों की हेरा-फेरी हो चुकी थी।

मामला सामने आते ही नायब सिंह सैनी की सरकार एक्टिव हुई। फौरन IDFC बैंक में अपने खाते बंद करके सारे पैसे सरकारी बैंकों में ट्रांसफर करने का आदेश दिया गया। वहीं, इस घोटाले की शुरुआती जांच के बाद IDFC बैंक ने अपने पांच कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और इस मामले की रिपोर्ट रिज़र्व बैंक को भी दी है।

आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि सरकारी खातों से निकाले गए 556 करोड़ रुपए और उस पर ब्याज के 22 करोड़ रुपए सरकारी खातों में वापस आ चुके हैं। नायब सैनी ने कहा कि सरकारी खातों से पैसे कैसे निकले, किसने निकाले और इसमें कौन कौन शामिल है, इसका पता लगाने के लिए हरियाणा के फाइनेंस सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी गई है।

विपक्ष ने लगाए आरोप

हरियाणा सरकार के पैसे तो वापस आ गए लेकिन, विपक्षी दलों का इल्ज़ाम है कि IDFC बैंक का ये घोटाला बहुत बड़ा है। इसमें कई बड़े अधिकारी और सरकार के बड़े नेता भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए इसकी एक इंडीपेंडेंट इन्क्वायरी होनी चाहिए। जाहिर है जब ऐसे फ्रॉड के मामले सामने आते हैं तो सरकारी सिस्टम पर शक होता है और बैंक पर भी भरोसे का संकट होता है। ये अच्छी बात है कि IDFC बैंक ने भरोसा दिलाया है कि ये सिर्फ एक ब्रांच के कुछ कर्मचारियों से जुड़ा मामला है और आम लोगों का पैसा उनकी बैंक में पूरी तरह सुरक्षित है।

IDFC First Bank ने क्या जानकारी दी

IDFC First Bank की ओर से एक लिखित स्टेटमेंट जारी करके जानकारी दी गई है कि उनकी चंडीगढ़ ब्रांच में कुछ कर्मचारियों के द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में जो फ्रॉड किया गया था उसकी करीब 583 करोड़ रुपए की रकम मामले के सामने आने के 24 घंटे के अंदर ही बैंक के द्वारा हरियाणा सरकार के विभागों को लौटा दी गई है।

बैंक ने अपनी स्टेटमेंट में माना है कि उनके कुछ कर्मचारियों ने ये फ्रॉड किया है और उनके खिलाफ बैंक की जांच जारी रहेगी और बैंक की और से हरियाणा सरकार की एजेंसियों को भी जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा। हरियाणा सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुई वित्तीय अनिताओं की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता समेत तीन अधिकारी शामिल किए गए हैं।

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