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IVF से जुड़े आम मिथक और उनकी सच्चाई, डॉक्टर ने बताया कब आईवीएफ की जरूरत पड़ती है

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jul 25, 2026 06:00 am IST,  Updated : Jul 25, 2026 06:00 am IST

आईवीएफ उन लाखों करोड़ों माता पिता के लिए उम्मीद की किरण है जिन्हें नेचुरली बेबी प्लानिंग में दिक्कत आ रही है। हर साल आईवीएफ को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए 25 जुलाई को World IVF Day 2026 मनाया जाता है।

विश्व आईवीएफ दिवस 2026- India TV Hindi
विश्व आईवीएफ दिवस 2026 Image Source : INDIA TV

हर साल 25 जुलाई को विश्व आईवीएफ दिवस (World IVF Day) मनाया जाता है। IVF उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो नेचुरली माता-पिता नहीं बन पा रहे हैं। साल 1978 में दुनिया की पहली आईवीएफ यानि इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन बेबी लुईस ब्राउन का जन्म हुआ था। इसके बाद मेडिकल जगत में इस बड़ी क्रांति शुरुआत हुई। करीब 5 दशक बाद आईवीएफ केवल सिर्फ एक ट्रीटमेंट नहीं बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है, जिनके नेचुरली बच्चे नहीं हो पाते हैं।

डॉक्टर मनन गुप्ता (चेयरमैन, प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, एलांटिस हेल्थकेयर, नई दिल्ली) ने बताया कि आज के दौर में जब महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ती उम्र में शादी, तनाव, मोटापा, हार्मोनल असंतुलन, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), एंडोमेट्रियोसिस और पुरुषों में शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।

आईवीएफ क्या है?

आईवीएफ एक ऐसी उन्नत तकनीक है, जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को प्रयोगशाला में फर्टिलाइज्ड किया जाता है। इसके बाद बने स्वस्थ भ्रूण को महिला के गर्भ में डाला जाता है। जिससे नॉर्मल प्रेगनेंसी हो सके।

कब आईवीएफ की सलाह दी जाती है?

  • जब महिला के दोनों फैलोपियन ट्यूब बंद हों
  • जब पुरुष के शुक्राणु कम या कमजोर हों
  • एंडोमेट्रियोसिस की स्थिति हो
  • लंबे समय तक बिना कारण गर्भधारण न होना
  • ज्यादा उम्र जिसमें 35 साल से अधिक उम्र हो
  • बार-बार आईयूआई (IUI) असफल होना
  • आनुवंशिक बीमारियों से बचाव के लिए विशेष परिस्थितियां

क्या आईवीएफ में भी उम्र का महत्व होता है?

बिल्कुल ये जानना जरूरी है क्योंकि आईवीएफ में भी उम्र का महत्वपूर्ण रोल है। आईवीएफ की सफलता केवल तकनीक पर निर्भर नहीं करती, बल्कि महिला की उम्र सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है। 35 साल की उम्र के बाद अंडाणुओं की संख्या और क्वालिटी दोनों में कमी आने लगती है, जिससे प्रेगनेंसी की संभावना धीरे-धीरे घटती जाती है। अगर आप 1 साल से नेचुरली ट्राई कर रहे हैं और गर्भधारण नहीं कर पा रहे हैं तो बिना देर किए फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें।

आईवीएफ से जुड़े आम मिथक

मिथक- आईवीएफ से जन्म लेने वाले बच्चे सामान्य नहीं होते।

सच्चाई- वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि आईवीएफ से जन्मे बच्चे पूरी तरह सामान्य, स्वस्थ और अन्य बच्चों की तरह ही विकसित होते हैं।

मिथक- आईवीएफ हमेशा सफल होता है।
सच्चाई- सफलता कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे महिला की उम्र, अंडाणुओं की गुणवत्ता, भ्रूण की स्थिति और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कारण। कई बार एक से अधिक चक्र की आवश्यकता पड़ सकती है।

मिथक- आईवीएफ केवल महिलाओं की समस्या का इलाज है।
सच्चाई- लगभग 40–50 प्रतिशत मामलों में पुरुष संबंधी कारण भी बांझपन के लिए जिम्मेदार होते हैं। इसलिए जांच और उपचार दोनों पार्टनर्स का होना चाहिए।

लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण योगदान

आईवीएफ की सफलता केवल मेडिकल तकनीक पर नहीं, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करती है। अत्छा बैलेंस खाना, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण, धूम्रपान और शराब से दूरी और वजन को कंट्रोल रखना प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एग फ्रीजिंग से आईवीएफ हो सकता है?

आजकल देर से शादी करने वाली महिलाएं एग फ्रीजिंग का विकल्प चुन रही हैं। कई महिलाएं शिक्षा, करियर या दूसरा व्यक्तिगत कारणों की वजह से गर्भावस्था को टालना चाहती हैं। ऐसे मामलों में एग फ्रीजिंग अच्छा विकल्प है। 30 साल तक की उम्र एग फ्रीज के लिए अच्छी मानी गई है। एग फ्रीजिंग भविष्य में प्रेगनेंसी की संभावनाओं को सुरक्षित रखने का एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 

 

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