अगर आपकी रिपोर्ट्स में भी कोलेस्ट्रॉल ज्यादा आता है तो इसे गंभीरता से लें। हाई कोलेस्ट्रॉल हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा सकता है। दवा के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव और व्यायाम से इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इसके अलावा आप कोलेस्ट्रॉल कम करने के आसान घरेलू उपाय भी अपना सकते हैं। जिससे आपको काफी फायदा मिलेगा। आइये आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेद क्लीनिक) से जानते हैं कि कोलेस्ट्रोल को आयुर्वेदिक उपायों से कैसे कम किया जा सकता है।
कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?
आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में कफ की अधिकता से कोलेस्ट्रॉल बनता है। शरीर में दो तरह के कोलेस्ट्रॉल होते हैं। अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL–हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) और बुरा कोलेस्ट्रॉल (LDL–लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन)।
HDL यानी 'अच्छा' कोलेस्ट्रॉल- काफी हल्का होता है और ब्लड वेसल्स से फैट जमाव को हटाता है।
LDL यानी ‘ख़राब’ कोलेस्ट्रॉल- ये काफी चिपचिपा और गाढ़ा होता है।
LDL लेवल हाई होने से क्या होता है?
अगर LDL का लेवल ज्यादा हो तो यह खून की नसों और धमनियों की दीवारों पर जमा हो जाता है, जिससे खून के बहाव में रुकावट आती है। कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ लेवल सेहत के लिए नुकसानदायक होता है और इससे हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कोलेस्ट्रॉल का लेवल चेक करने के लिए लिपिड प्रोफ़ाइल नाम का ब्लड टेस्ट किया जाता है।
आयुर्वेद क्या कहता है?
कोलेस्ट्रॉल का स्तर इस प्रकार बनाए रखा जाना चाहिए। एक स्वस्थ व्यक्ति में, कुल कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से कम, HDL 60 mg/dL से ज़्यादा और LDL 100 mg/dL से कम होना चाहिए।
कोलेस्ट्रॉल के प्रकार और उनकी सही मात्रा
टोटल कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol)- 200 mg/dL से कम
एलडीएल (LDL-खराब कोलेस्ट्रॉल)- 100 mg/dL से कम (हार्ट के मरीजों के लिए 70 mg/dL से कम)
एचडीएल (HDL-अच्छा कोलेस्ट्रॉल)- पुरुषों में 40 mg/dL से अधिक और महिलाओं में 50 mg/dL से अधिक (आदर्श रूप से 60 mg/dL या उससे अधिक)
ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides)- 150 mg/dL से कम
कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के क्या कारण हो सकते है?
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अस्वस्थ खान-पान- खाने में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की ज़्यादा मात्रा से इस फैट का लेवल बढ़ सकता है।
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शारीरिक गतिविधि की कमी- जो लोग बहुत कम शारीरिक गतिविधि (जैसे व्यायाम, योग या अन्य शारीरिक मेहनत) करते हैं, उनमें इसका लेवल बढ़ सकता है।
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धूम्रपान- धूम्रपान से भी शरीर में इस फैट का लेवल बढ़ सकता है।
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शराब का सेवन- बहुत ज़्यादा शराब पीना भी एक कारण है।
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जेनेटिक हिस्ट्री- जेनेटिक्स भी भूमिका निभाते हैं; जिन लोगों के परिवार में हाई कोलेस्ट्रॉल की हिस्ट्री रही है, उन्हें इसका ज़्यादा खतरा होता है।
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डायबिटीज- डायबिटीज भी लेवल बढ़ने का एक मुख्य कारण है।
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अन्य मेडिकल स्थितियां- कुछ पुरानी या खास मेडिकल स्थितियां- जैसे लिवर या किडनी की पुरानी बीमारी, हाइपोथायरायडिज्म और एड्स भी इसके मूल कारण हो सकते हैं।
डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में कोलेस्रॉल को 'मेदा धातु में वृद्धि' (चर्बी) और 'कफ दोष का असंतुलन' माना जाता है। 'सुश्रुत संहिता' और 'चरक संहिता' में मेद (वसा) और कफ की अधिकता के लक्षणों और कारणों का विवरण देने वाले श्लोक दिए गए हैं।
"स्निग्धांगतामुदर पार्श्ववृद्धि कास श्वासादीन दौर्गन्ध्य च।"
अर्थ- शरीर में फैट (एडिपोज़ टिश्यू/कोलेस्ट्रॉल) बढ़ने से कई तरह की समस्याएं होती हैं, जैसे शरीर के अंगों का बहुत ज्यादा तैलीय होना, पेट और कमर (पसलियों के पास का हिस्सा) का बढ़ना, खांसी, सांस फूलना और शरीर से बदबू आना।
कोलेस्ट्रॉल कम करने के आयुर्वेदिक उपाय
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सरसों का तेल- इसमें मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स काफी मात्रा में होते हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं। अगर आपको कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, तो आपको हमेशा सरसों का तेल इस्तेमाल करना चाहिए।
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धनिया और मेथी के बीज- धनिया के बीज का पानी पाचन को बेहतर बनाने और कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद करता है। वहीं मेथी में मौजूद घुलनशील फाइबर आंतों में कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकता है।
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अलसी के बीज- अलसी के बीज के पाउडर का सेवन करने से फायदा होगा। आप इसे छाछ में मिलाकर करें या ऐसे ही खा लें। इससे बढ़ते कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल में रखने में मदद मिलेगी।
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सोयाबीन- सोयाबीन, दालें और अंकुरित अनाज खून से LDL कोलेस्ट्रॉल को हटाने में लिवर की मदद करते हैं। ये खाद्य पदार्थ अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में भी मदद करते हैं।
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कफ-संतुलन आहार- उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ, पनीर, प्रोसेस्ड फूड, गाढ़े दूध और ठंडे पेय पदार्थों से बचें।
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हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन- अपने आहार में अदरक, दालचीनी, हल्दी, जई और ताजे फल जैसे आंवला और नींबू शामिल करें।
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शारीरिक गतिविधि- मेद धातु (शरीर में वसा ऊतक) का संतुलन बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, योग और प्राणायाम करते रहें।
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किशमिश बादाम- 10-12 किशमिश और 6-7 बादाम को रात भर पानी में भिगोकर रखें। सुबह खाली पेट इनका सेवन करें। इससे कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीज़ों को इनका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए, लेकिन ध्यान रखें कि अगर आपको डायबिटीज़ है, तो किशमिश खाने से बचें।
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गुग्गुल- यह शरीर के वसा चयापचय में सुधार करता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।
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अर्जुन की छाल- यह हृदय स्वास्थ्य के लिए एक शक्तिशाली उपाय है। शोध से पता चलता है कि अर्जुन की छाल का पाउडर एलडीएल के स्तर को काफी कम कर सकता है और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत कर सकता है।
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त्रिफला- हर रात गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच त्रिफला पाउडर का सेवन करने से पाचन में सुधार होता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, जिससे लिपिड प्रोफाइल बढ़ता है।
सुझाव- किसी भी आयुर्वेदिक दवा या जड़ी-बूटी (जैसे आरोग्यवर्धिनी वटी, लिपोमैप या गुग्गुल सप्लीमेंट्स) का इस्तेमाल शुरू करने से पहले, अपनी शरीर की बनावट के आधार पर सही डोज़ के बारे में सलाह लेने के लिए किसी सर्टिफाइड आयुर्वेदिक डॉक्टर से ज़रूर बात करें।