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फेफड़ों को मजबूत कैसे बनाएं? स्वामी रामदेव ने बताया रामबाण तरीका

 Written By: Sajid Khan Alvi, Edited By: Ritu Raj
 Published : Dec 20, 2025 08:47 am IST,  Updated : Dec 20, 2025 08:47 am IST

भारत समेत दुनियाभर में फेफड़ों से जुड़े मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में लंग्स को हेल्दी रखना बेहद जरूरी है। स्वामी रामदेव ने यहां बताया है किस तरह आप अपने लंग्स को मजबूत बना सकते हैं।

फेफड़ों को मजबूत कैसे बनाएं?- India TV Hindi
फेफड़ों को मजबूत कैसे बनाएं? Image Source : PATANJALI/FREEPIK

इस दुनिया में कबूतर करीब दो ढाई करोड़ साल से हैं। पिछले तकरीबन 5-6 हज़ार साल से इंसान के दोस्त रहे हैं वो अपनी ज़रूरत के हिसाब से इनका इस्तेमाल भी करता रहा है। ये कभी दो देशों के बीच शांति दूत बने तो कभी जासूस और कभी दो प्रेमियों के बीच लव क्यूपिड बने। क्योंकि इनकी नेविगेशन क्वालिटी ऐसी होती है कि फोन के मैप को भी फेल कर दे। तभी तो कबूतर कितनी भी लंबी उड़ान भर ले। शाम को अपने ठिकाने पर लौट आने के लिए फेमस होते हैं। लेकिन आजकल ये किसी और वजह से बदनाम हो रहे हैं जिससे इनको दाना खिलाने पर भी बैन लगाने की बात हो रही है।

बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशो के बाद मुंबई नगर निगम ने तो ज़रूरी कबूतरों को सार्वजनिक जगह पर दाना खिलाने पर रोक लगाई थी। लेकिन अब कहां ऐसा होने वाला है। अब कर्नाटक सरकार ने भी शहरी इलाकों में बढ़ती सांस से जुड़ी बीमारियों को देखते हुए सार्वजनिक जगहों पर कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगाने की तैयारी में है।

क्योंकि हेल्थ एक्सपर्टस के मुताबिक कबूतर से 'इंटर-स्टिशिअल लंग्स डिजीज' यानि ILD फैल रही है जिसमें 'हाइपर सेंसिटिविटी ''न्यू-म-नाइटस'' सबसे जानलेवा है। जिसकी गिरफ्त में ILD के 50% पेशेंट आते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है कबूतर की बीट जो फ्लोर-दीवारों पर गिरने के बाद डस्ट बनकर हवा में मिल जाती है और सांसों के जरिए रेस्पिरेटरी ट्रैक तक पहुंच जाती है।

फिर लंग्स में पहुंचकर ये इंफेक्शन की वजह बनती है। जिसका पता दो-ढाई महीने के अंदर चल जाए तो क्योर के चांस है। लेकिन ऐसा होता नहीं है ज्यादातर मामलों में पता तब लगता है जब लंग्स डैमेज होकर इर्रिवर्सेबल कंडीशन में पहुंच जाते हैं। तो फिर इससे बचने का तरीका क्या है। बाबा रामदेव से जानें लंग्स को कैसे मजबूत बनाया जाए।

खतरे में लंग्स

रेस्पिरेटरी डिसऑर्डर

लंग्स में इंफेक्शन

सांस नली में सिकुड़न

चेस्ट में जकड़न-भारीपन

सांस लेने में दिक्कत

भारत में अस्थमा पेशेंट की संख्या

भारत में अस्थमा के मरीजों की संख्या 3 करोड़ से ज्यादा है। फर्स्ट स्टेज वाले 82% बीमारी से अंजान हैं। वहीं दुनिभर में 13.09% अस्थमा के मरीज हैं।

अस्थमा की वजह

क्लाइमेट चेंज-50%

केमिकल का इस्तेमाल-37%

पॉल्यूशन-डस्ट- 42%

फिज़िकल एक्सरसाइज़- 13%

लाइफस्टाइल हैबिट- 28%

स्ट्रेस - 16%

फेफड़ों को कैसे फौलादी बनाएं

रोज प्राणायाम करें।

हल्दी वाला दूध पीएं।

त्रिकुटा पाउडर लें।

रात को स्टीम लें।

खांसी में रामबाण है ये चीजें

100 ग्राम बादाम लें

20 ग्राम कालीमिर्च लें

50 ग्राम शक्कर लें

इसके लिए बादाम,कालीमिर्च,शक्कर मिला लें और दूध के साथ 1 चम्मच खाने से फायदा होगा।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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