कब्ज की समस्या आजकल काफी आम हो गई है। खराब खान-पान, कम फाइबर लेना, पर्याप्त पानी न पीना और शारीरिक गतिविधि की कमी इसकी वजह बन सकती है। गट हेल्थ न्यूट्रिशनिस्ट परिधि ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर कुछ ऐसे फूड्स के बारे में बताया है, जिन्हें डाइट में शामिल करने से पाचन तंत्र को बेहतर रखने और कब्ज की समस्या को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।
कब्ज के मरीज डाइट में शामिल करें ये फूड्स
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कीवी: कीवी में फाइबर और पानी की अच्छी मात्रा होती है, जो मल को नरम करने और बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इसे नाश्ते या मिड-मॉर्निंग स्नैक के तौर पर खाया जा सकता है।
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सूखे आलूबुखारे: सूखे आलूबुखारे यानी प्रून्स कब्ज के लिए लोकप्रिय विकल्प हैं। इनमें फाइबर के साथ सॉर्बिटोल या जाता है, जो आंतों में पानी खींचने में मदद कर सकता है और मल त्याग को आसान बना सकता है।
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दही: दही में प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को सपोर्ट कर सकते हैं। नियमित डाइट में दही शामिल करना गट हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है।
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अलसी के बीज: अलसी के बीज फाइबर से भरपूर होते हैं। ये मल बढ़ाने और बाउल मूवमेंट को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इन्हें पीसकर दही, स्मूदी या दलिया में मिलाकर लिया जा सकता है। साथ ही, फाइबर बढ़ाते समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है।
इन बातों का भी रखें ख्याल
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ज़्यादा फ़ाइबर वाले फ़ूड्स को एकदम से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे अपनी डाइट में शामिल करें। फ़ाइबर की मात्रा अचानक बढ़ाने से कभी-कभी ब्लोटिंग (पेट फूलना), गैस या बेचैनी हो सकती है।
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ध्यान रखें कि आप पूरे दिन में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। फ़ाइबर तब सबसे अच्छा काम करता है जब शरीर में पानी की कमी न हो।
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शुरुआत कम मात्रा से करें और देखें कि आपका पेट कैसा महसूस करता है। एकदम से बहुत ज़्यादा बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है।
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नियमित रूप से शारीरिक गतिविधि करने से ये फ़ूड्स और भी बेहतर काम कर सकते हैं। रोज़ाना थोड़ी देर टहलने से भी पेट साफ़ रहने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है)