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क्या फलों की शुगर चीनी और मिठाइयों से ज्यादा हेल्दी होती है, डॉक्टर ने बताया दोनों में क्या अंतर है?

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jul 11, 2026 07:39 am IST,  Updated : Jul 11, 2026 07:39 am IST

क्या फलों में पाई जाने वाली शुगर मिठाई और चीनी से ज्यादा हेल्दी होती है। हार्ट के डॉक्टर ने बताया कि शरीर को कौन सी शुगर कम नुकसान पहुंचाती है?

फल और चीनी की मिठास में अंतर- India TV Hindi
फल और चीनी की मिठास में अंतर Image Source : INDIA TV

आजकल हर कोई चीनी और मीठी चीजों को कम खाने की सलाह देता है, लेकिन मीठे फलों को भरपूर खाने के लिए कहा जाता है। आखिर, फलों में नेचुरल शुगर होती है जिससे अक्सर लोग यह सवाल करते हैं कि क्या फलों की शुगर मिठाइयों, कोल्ड ड्रिंक या प्रोसेस्ड फूड में पाई जाने वाली चीनी से वाकई अलग होती है। हार्ट सर्जन डॉक्टर जेरेमी लंदन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया है कि इसका सच क्या है। 

डॉक्टर जेरेमी लंदन के मुताबिक इसका जवाब हां और ना दोनों है। क्योंकि चीनी रासायनिक रूप से समान है, शरीर इसे कैसे पचाता है यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि इसके साथ क्या लिया जाता है।

क्या फलों में पाई जाने वाली शुगर और चीनी एक ही चीज है?

डॉक्टर लंदन ने कहा कि फलों और चीनी की मिठास एक समान ही होती है। अगर शुगर के अणुओं को अलग करके अकेले ही सेवन किया जाए, तो शरीर उन्हें एक तरह से ही लेगा। उन्होंने समझाया कि असली अंतर उन शुगर अणुओं के आसपास मौजूद चीजों में है। रासायनिक रूप से चीनी एक जैसी होती है, लेकिन सेब में भी चीनी होती है और ग्लेज़्ड डोनट में भी चीनी होती है। लेकिन जिस तरह से हम इन दोनों चीजों को पचाते हैं, वह पूरी तरह से अलग है। चीनी दोनों में है लेकिन चीनी के साथ क्या मिल रहा है इससे शरीर में बहुत बड़ा फर्क पड़ता है।

साबुत फल शरीर पर क्या असर डालते हैं?

डॉक्टर ने बताया कि साबुत फलों में नेचुरल शुगर होती है, लेकिन इनमें फाइबर और पानी भी होता है। ये पाचन क्रिया को धीमा करते हैं और ब्लड शुगर के स्तर में होने वाली तेजी को कम करने में मदद करते हैं, जो आमतौर पर उतनी ही मात्रा में चीनी का सेवन करने पर होती है। फल पॉलीफेनॉल और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भी भरपूर होते हैं, जो उन्हें ऐसे पोषण संबंधी फायदे देता है जो प्रोसेस्ड चीनी में नहीं पाए जाते हैं। सेब में फाइबर होता है। इसमें पानी, पॉलीफेनॉल और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये चीजें पाचन क्रिया को धीमा करती हैं। यह आपके शरीर के शुगर को प्रोसेस्ड करने के तरीके को प्रभावित करता है। इसलिए यह आपके ग्लाइसेमिक इंडेक्स के साथ-साथ शुगर के पूरे मेटाबॉलिज्म पर भी असर डालती है।

साबुत फल शुगर के बेहतर विकल्प क्यों है?

डॉक्टर लंदन ने इस बात पर जोर दिया कि ये फायदे खासतौर से साबुत फलों पर लागू होते हैं। उन्होंने कहा, जब मैं साबुत फलों की बात करता हूं, तो मेरा मतलब सचमुच साबुत फलों से ही होता है क्योंकि फलों के रस और सूखे फलों में भी ये पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। फलों के रस से लगभग सारा फाइबर निकल जाता है, जिससे यह एक मीठे पेय की तरह काम करते हैं। वहीं सूखे मेवे अपना फाइबर बरकरार रखते हैं लेकिन अपना अधिकांश पानी खो देते हैं, जिससे चीनी की मात्रा बढ़ जाती है और कम समय में अधिक मात्रा में इसका सेवन करना आसान हो जाता है।

साबुत फल में कैलोरी की मात्रा के हिसाब से मीठे पेय पदार्थों या प्रोसेस्ड स्नैक्स की तुलना में ज्यादा फुल फील कराने वाले होते हैं। यही कारण है कि यह नेचुरल शुगर के लिए फलों को बेस्ट माना जाता है। फल खाने से शरीर को ऐसे जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं जो प्रोसेस्ड शुगर के नहीं मिल सकते हैं।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

 

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