मिर्गी (Epilepsy) एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें दिमाग की असामान्य विद्युत गतिविधि के कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं। मिर्गी का दौरा पड़ने पर शरीर अकड़ने लगता है या फिर हाथ-पैरों में अलग से हलचल होती है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सावधानियां बरतनी चाहिए और मरीज को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाना चाहिए। पीएसआरआई हॉस्पिटल कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी, डॉ. भास्कर शुक्ला, से जानते हैं मिर्गी का दौरा कितने दिनों में पड़ता है और इस बीमारी में कौन सा अंग सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है?
मिर्गी का दौरा कितने दिनों में पड़ता है?
मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि असामान्य हो जाती है। यही असामान्य गतिविधि दौरे का कारण बनती है। हर व्यक्ति में मिर्गी के दौरे आने का पैटर्न अलग होता है, इसलिए यह कहना मुश्किल है कि कितने दिनों में दौरा पड़ेगा। कुछ लोगों में हफ्तों या महीनों तक दौरा नहीं आता, जबकि कुछ में तनाव, नींद की कमी, दवा मिस करने या तेज रोशनी जैसे ट्रिगर्स से जल्दी दौरा आ सकता है। इसलिए नियमित दवा लेना और ट्रिगर्स से बचना बहुत जरूरी है।
मिर्गी कौन सा अंग सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है?
मिर्गी में सबसे अधिक प्रभावित होने वाला अंग मस्तिष्क है। जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में अचानक तेज और अनियंत्रित विद्युत गतिविधि होती है, तो दौरा शुरू होता है। किस हिस्से में समस्या है, इसके आधार पर लक्षण अलग-अलग दिखाई देते हैं। जैसे कभी शरीर झटके लेता है, कभी कुछ देर के लिए बेहोशी या घूरने जैसी स्थिति होती है, और कभी अचानक शरीर का कोई हिस्सा कुछ सेकंड के लिए जकड़ सकता है।
मिर्गी का सही उपचार समय पर मिल जाए तो अधिकांश लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं। दवाएँ नियमित लेना, नींद पूरी करना, शराब और तनाव से दूरी रखना, और डॉक्टर की सलाह से ही दवा में बदलाव करना बहुत जरूरी है। अगर बार-बार दौरे आ रहे हों या दवा के बावजूद नियंत्रण न हो, तो तुरंत विशेषज्ञ न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।