डायबिटीज आज के वक्त में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक है। यह ऐसी समस्या है जिसकी चपेट में लोग तेजी से आ रहे हैं। बुजुर्गों के साथ साथ युवाओं और बच्चों में भी डायबिटीज की परेशानी बढ़ रही है। यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है जहां प्रतिरक्षा प्रणाली अग्न्याशय में इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला करती है। बता दें, डायबिटीज दो प्रकार के होते हैं। टाइप 1 और टाइप 2। आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में प्रमुख एंडोक्राइनोलॉजी डॉ. धीरज कपूर, से जानते हैं दोनों में फर्क क्या है और डायबिटीज से बचने के लिए क्या करें?
क्या है टाइप 1 डायबिटीज?
टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से पैनक्रियाज की उन कोशिकाओं को नष्ट कर देती है, जो इंसुलिन बनाती है। इसके कारण शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। यह बीमारी आमतौर पर बचपन या किशोर अवस्था में शुरू होती है। इसलिए इसे टाइप वन या जूविनाइल डायबिटीज भी कहा जाता है। टाइप 1 के मरीजों को लाइफटाइम इंसुलिन इंजेक्शन लेना पड़ता है, क्योंकि बिना इंसुलिन के शरीर ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं कर पाता है।
टाइप 2 डायबिटीज क्या है?
टाइप 2 डायबिटीज बड़े-बुजुर्गों को होता है। यह लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है। इसमें शरीर इंसुलिन तो बनाता है लेकिन कोशिकाएं उस पर सही प्रकार से प्रतिक्रिया नहीं देती है। इसे इन्सुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। समय के साथ इंसुलिन का स्तर घटता जाता है और ब्लड शुगर बढ़ता जाता है। आजकल युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
कैसे करें बचाव?
डायबिटीज होने के बाद अगर इसे कंट्रोल में ना किया जाए, तो उससे कई तरह की गंभीर बीमारी हो सकती है जैसे- दिल, किडनी, आंखों, नसों और लिवर को नुकसान हो सकता है। हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, तनाव नियंत्रण और वजन संतुलित रखकर डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक आप घटा सकते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।