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दर्द न होना भी हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए क्यों देर से पहचान में आते हैं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण?

 Written By: Ritu Raj
 Published : Oct 14, 2026 05:11 pm IST,  Updated : Oct 14, 2026 05:11 pm IST

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर शरीर में कोई गंभीर बीमारी पल रही है, तो वह दर्द या किसी बड़ी तकलीफ के रूप में सामने आएगी। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर के मामले में यह धारणा पूरी तरह गलत और खतरनाक साबित हो सकती है। जान लें इसके लक्षण क्या हैं।

दर्द न होना भी हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए क्यों देर से पहचान में आते हैं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण?- India TV Hindi
दर्द न होना भी हो सकता है खतरे की घंटी, जानिए क्यों देर से पहचान में आते हैं ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण? Image Source : MAGNIFIC

महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारत में स्तन कैंसर से पीड़ित 60% महिलाओं में इस बीमारी का पता गंभीर अवस्था में चलता है। इस स्थिति में इलाज काफी मुश्किल हो जाता है और बीमारी के ठीक होने की संभावना काफी कम हो जाती है। ज़्यादातर मरीज़ों के मामले में सबसे दुखद बात यह है कि उन्हें स्तन में गांठ महसूस तो होती है, लेकिन वे यह सोचकर उसे नज़रअंदाज़ कर देती हैं कि इसमें कोई खतरा नहीं है, क्योंकि इसमें दर्द नहीं होता। लेकिन यह सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है, जिसे दूर करना बेहद जरूरी है। रजत बजाज, डायरेक्टर और यूनिट हेड, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, फोर्टिस नोएडा बता रहे हैं कि ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण क्या होते हैं और कब इसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। 

क्या कहते हैं डॉक्टर

स्तन में कैंसर की शुरुआती गांठ में लगभग हमेशा दर्द नहीं होता है। भारत में हमें ऐसा मानने की आदत हो गई है कि दर्द का मतलब खतरा है। अगर किसी महिला को अपने स्तन या बगल में बिना दर्द वाली सूजन महसूस होती है, तो उसे नजरअंदाज न करें और इसे खतरनाक स्तर तक पहुंचने से पहले ही रोकें।

भारतीय महिलाएं डॉक्टर के पास इतनी देर से क्यों जाती हैं? 

  • परिवार को पहले रखने की आदत: आमतौर पर भारतीय महिलाएं अपने परिवार की रीढ़ होती है। वह हमेशा अपने परिवार और घर के कामों को प्राथमिकता देती है। इस हद तक कि वह हर समय अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करती रहती है।
  • शर्म और झिझक: हमारे पारंपरिक समाज में स्तनों के बारे में खुलकर बात नहीं की जाती। इस विषय पर बात करने में झिझक और हिचकिचाहट के कारण महिलाएं अपने शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में अपने पति या यहां तक कि परिवार की दूसरी महिलाओं से भी बात नहीं कर पाती हैं।
  • जागरूकता की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का आभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली कई महिलाओं को स्तनों की स्वयं जांच करने के बुनियादी तरीकों की जानकारी नहीं होती है। उन्हें बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं, जैसे मैमोग्राम जांच केंद्र भी उपलब्ध नहीं होते हैं, खासकर दूर-दराज़ के इलाकों में।

डॉक्टर की अपील
आपके परिवार की सेहत आपकी सेहत पर निर्भर करती है। इसलिए महिलाओं को अपनी सेहत को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। हमेशा अपने लिए समय निकालें और हर महीने माहवारी खत्म होने के बाद सिर्फ पांच मिनट निकालकर आईने के सामने अपने स्तनों की जांच करें। स्तन में किसी नई, सख्त गांठ, स्तन के आकार या बनावट में बदलाव, त्वचा में बदलाव या निप्पल से किसी असामान्य स्राव पर ध्यान दें। अगर आपको बिना दर्द वाली गांठ महसूस होती है, तो घबराएं नहीं और इसे छिपाएं भी नहीं। अपने प्रियजनों को इसके बारे में बताएं और तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से मिलें। समय पर इसका इलाज कराने से जान बचाई जा सकती हैं। 

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