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किडनी फेल तक कर सकती हैं ये 2 बीमारियां, लाखों गुर्दों को चुपचाप पहुंचा रही हैं नुकसान

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jul 04, 2025 07:38 am IST,  Updated : Jul 04, 2025 07:38 am IST

Kidney Damage: लाइफस्टाइल से जुड़ी ये दो बीमारियां शरीर को अंदर से खोखला बना सकती है। किडनी के लिए इन्हें साइलेंट किलर माना जाता है। लाखों किडनी को चुपचाप इससे नुकसान हो रहा है। इसलिए आपको सावधान रहना चाहिए।

किडनी फेल होने की वजह- India TV Hindi
किडनी फेल होने की वजह Image Source : AI IMAGE

शरीर के सारे अंग कहीं न कहीं एक दूसरे से जुड़े हैं। इसलिए एक बीमारी सिर्फ किसी एक खास अंगो को ही प्रभावित नहीं करती बल्कि इससे शरीर के दूसरे अंगों को भी नुकसान होता है। खासतौर से दो सबसे आम बीमारियों हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) और डायबिटीज को खतरनाक माना जाता है। ये दोनों बीमारी लाखों लोगों की किडनी को नुकसान पहुंचा रही हैं। अहम बात ये है कि गुर्दों को ये नुकसान चुपचाप हो रहा है। हाई बीपी और शुगर करीब 70-80% क्रोनिक किडनी रोग (CKD) के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। क्रोनिक किडनी रोग के साथ मिलकर, ये सेहत के लिए खतरनाक तिकड़ी बनाते हैं, जो अक्सर तब तक बिना किसी ध्यान दिए बढ़ती रहती है जब तक कि डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं हो जाती।

शरीर में किडनी नेचुरल फिल्टर का काम करती है। शरीर में खाने के जरिए पहुंचने वाले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। फ्ल्यूड को बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का काम करती है। लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज किडनी में छोटी फिल्टरिंग यूनिट (ग्लोमेरुलस) को नुकसान पहुंचा सकती है।

शुगर और हाई ब्लड प्रेशर कैसे किडनी को प्रभावित करते हैं

डायबिटीज की वजह से ब्लड में शुगर लेवल बढ़ जाता है, जो किडनी में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इस स्थिति को डायबिटीज नेफ्रोपैथी के नाम से जाना जाता है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ाता है, उन्हें कमजोर बनाता है और उनकी फिल्टर करने की क्षमता को कम करता है। दोनों का साथ में मिलकर एक खतरनाक कॉम्बिनेशन बनाता है। जो साइलेंटली किडनी की नुकसान पहुंचाते हैं। अगर आपको हाई बीपी और डायबिटीज दोनों हैं, तो किडनी फेल होने का जोखिम दोगुना हो जाता है।

किडनी हो सकती है डैमेज

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को डैमेज कर सकते हैं। जिसकी वजह से किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है। ऐसा होने से शरीर में फ्ल्यूड और सोडियम रिटेंशन ब्लड प्रेशर को और खराब कर सकता है। इससे ऐसा साइकल शुरू होता है जो अक्सर अंतिम चरणों तक पता भी नहीं चलता।

किडनी रोग के लक्षण 

सीकेडी यानि क्रोनिक किडनी डिजीज के लक्षण शुरू में दिखाई नहीं देते। लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता है, इन बातों पर ध्यान देना चाहिए।

  • पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
  • बार-बार पेशाब आना खासतौर से रात में
  • झागदार पेशाब आना
  • थकान , कमज़ोरी, या भूख न लगना
  • हाई ब्लड प्रेशर जिसे कंट्रोल करना मुश्किल हो

लक्षण न दिखने पर भी डायबिटीज और बीपी के मरीज को किडनी की जांच करवाते रहना चाहिए

किडनी को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें

  1. ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें। डायबिटीज कंट्रोल के लिए HbA1c को 7% से कम रखें। ब्लड प्रेशर को 130/80 mmHg से कम रखने का टारगेट रखें। इसके लिए दवाओं का सेवन करें।

  2. साल में एक बार किडनी की जांच जरूर करवा लें। इसके लिए ब्लड और यूरिन से जुड़े टेस्ट करवाएं।

  3. किडनी के लिए हेल्दी खाना खाएं। जिसमें नमक, चीनी, रेड मीट और तले हुए भोजन से दूर रहें। खाने में फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें।

  4. रोजाना कम से कम 30 मिनट फिजिकल एक्टिविटी करें। जिसमें वॉक योगा या कोई एक्सरसाइज करें। दिनभर में 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं।

  5. बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मिलने वाली दवाओं के सेवन से बचें। ज्यादा पेनकिलर खाने से भी बचना चाहिए।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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