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साइलेंट किलर हो सकते हैं ब्लड प्रेशर और आर्टरीज से जुड़े ये बदलाव, महिलाएं भूलकर भी न करें इग्नोर

 Written By: Ritu Raj
 Published : Sep 16, 2026 04:28 pm IST,  Updated : Sep 16, 2026 04:28 pm IST

ब्लड प्रेशर और धमनियों का सख्त होना हार्ट से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। खासकर 30 से 40 साल की उम्र की महिलाओं में इसका खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

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साइलेंट किलर हो सकते हैं ब्लड प्रेशर और आर्टरीज से जुड़े ये बदलाव, महिलाएं भूलकर भी न करें इग्नोर Image Source : MAGNIFIC

हाई ब्लड प्रेशर और धमनियों का सख्त होना एक ऐसा "साइलेंट किलर" है, जो शरीर के अंदर बिना किसी बड़े लक्षण के सालों तक पनपता रहता है। महिलाओं में विशेष रूप से हॉरमोनल बदलावों के कारण यह समस्या ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है। मिड लाइफ यानी 30 से 40 की उम्र के बीच का समय, महिलाओं के हार्ट हेल्थ के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। अक्सर इस उम्र में महिलाओं में ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और बढ़ते वजन जैसी समस्याएं होती है। इस उम्र में ही लक्षण भी दिखाई देते हैं। लेकिन हार्ट और ब्लड वेसल्स में होने वाले कुछ बदलाव इससे काफी पहले शुरू हो सकते हैं और लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के रह सकते हैं। ऐसे में डॉक्टर जगदीप यादव निदेशक-कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल मानेसा बता रहे हैं कि महिलाओं में क्यों होती है ये समस्या। 

क्या कहते हैं डॉक्टर

उम्र बढ़ने के साथ हमारी आर्टरी धीरे-धीरे अपनी लचक खोने लगती हैं। इसे आर्टरी स्टिफनेस या धमनियों का कठोर होना कहा जाता है। जब आर्टरी कम लचीली होती हैं, तो हार्ट द्वारा पंप किए गए ब्लड के दबाव को संभालना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। इसका असर पल्स प्रेशर पर भी पड़ सकता है। पल्स प्रेशर, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर के बीच का अंतर होता है। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर सामान्य है या नहीं, बल्कि समय के साथ उसमें होने वाले बदलावों को समझना भी जरूरी है।

महिलाओं में मिडलाइफ के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव भी हार्ट और ब्लड वेसल्स के हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर पेरिमेनोपॉज और मेनोपॉज के आसपास वजन बढ़ना, नींद में बदलाव, तनाव, शारीरिक गतिविधि में कमी और मेटाबॉलिक बदलाव जैसे कई कारक एक साथ सामने आ सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर महिला में हार्ट से जुड़ा जोखिम एक ही उम्र या एक ही तरीके से बढ़ता है। 

डॉक्टर की महिलाओं को सलाह
एक कार्डियोलॉजिस्ट के तौर पर मैं महिलाओं को सलाह दूंगा कि वे अपने 30s और 40s में ही नियमित स्वास्थ्य जांच को प्राथमिकता दें। ब्लड प्रेशर के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, वजन, कमर, शारीरिक गतिविधि और इस बात का खास ध्यान रखें कि अगर परिवार में किसी को हार्ट से जुड़ी बीमारी है तो चेकअप जरूर करवाएं। यदि ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ रहा है या उसमें कोई पैटर्न बदल रहा है, तो इसे केवल उम्र या तनाव का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हार्ट हेल्थ की देखभाल लक्षण आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले शुरू होनी चाहिए। संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, स्ट्रेस को कंट्रोल करना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी छोटी आदतें हार्ट से जुड़े खतरे को कम करती है। 

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