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हार्ट की नसें ब्लॉक होने पर कौन से लक्षण दिखते हैं? एक्सपर्ट से जानें किन वजहों से होती है Blockage?

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Feb 26, 2026 10:56 pm IST,  Updated : Feb 26, 2026 10:56 pm IST

हार्ट की नस ब्लॉक होने पर शरीर में गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं. एक्सपर्ट बता रहे हैं इस स्थिति में कौन से संकेत दिखते हैं और किन वजहों से ऐसा होता है?

हार्ट की नस ब्लॉक होने पर लक्षण - India TV Hindi
हार्ट की नस ब्लॉक होने पर लक्षण Image Source : FREEPIK

हृदय हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, जो लगातार रक्त पंप कर पूरे शरीर तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। जब हृदय की धमनियों (कोरोनरी आर्टरीज) में रुकावट या ब्लॉकेज हो जाती है, तो इसे आमतौर पर कोरोनरी आर्टरी डिजीज कहा जाता है। नई दिल्ली में स्थित पीएसआरआई अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकार-कार्डियोलॉजी, डॉ. रवि प्रकाश के अनुसार, यह तब विकसित होती है जब हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों की अंदरूनी परत में कोलेस्ट्रॉल, वसा और अन्य तत्व जमा होकर प्लाक बना लेते हैं। धीरे-धीरे ये धमनियों को संकरा कर देते हैं और रक्त प्रवाह कम हो जाता है। गंभीर स्थिति में यही ब्लॉकेज हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।

हृदय की नस ब्लॉक होने का लक्षण

हार्ट की नस ब्लॉक होने का सबसे सामान्य लक्षण सीने में दर्द या जकड़न है, जिसे एंजाइना कहा जाता है। यह दर्द अक्सर सीने के बीच में दबाव या भारीपन जैसा महसूस होता है और बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है। कई लोगों को चलने, सीढ़ियां चढ़ने या तनाव की स्थिति में यह दर्द बढ़ जाता है और आराम करने पर कम हो जाता है।

इसके अलावा सांस फूलना, अत्यधिक थकान, चक्कर आना, मतली, ठंडा पसीना आना और बेचैनी भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं। कुछ मरीजों में दिल की धड़कन तेज या अनियमित हो सकती है। महिलाओं, बुजुर्गों और मधुमेह के मरीजों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते। उन्हें सीने में तेज दर्द की बजाय अपच, पीठ दर्द, हल्की घबराहट या कमजोरी महसूस हो सकती है, जिससे बीमारी की पहचान देर से होती है।

क्या हैं ब्लॉकेज के कारण?

ब्लॉकेज के प्रमुख कारणों में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मोटापा शामिल हैं। धूम्रपान धमनियों की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाकर प्लाक बनने की प्रक्रिया को तेज करता है। शारीरिक निष्क्रियता, असंतुलित आहार, अत्यधिक तली-भुनी और प्रोसेस्ड चीजों का सेवन, साथ ही लगातार मानसिक तनाव भी जोखिम बढ़ाते हैं। जिन लोगों के परिवार में हृदय रोग का इतिहास होता है, उनमें यह खतरा अधिक होता है।

कैसे करें बचाव?

समय पर जांच, जैसे लिपिड प्रोफाइल, ईसीजी और स्ट्रेस टेस्ट, जोखिम का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और तनाव प्रबंधन अपनाकर हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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