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प्रेग्नेंसी कब हो जाती है High-Risk? डॉक्टर ने बताया किन महिलाओं को Extra Monitoring की होती है जरूरत?

 Written By: Poonam Yadav
 Published : Sep 19, 2026 12:20 pm IST,  Updated : Sep 19, 2026 12:20 pm IST

हर प्रेग्नेंसी एक जैसी नहीं होती। कुछ महिलाओं में उम्र, पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण प्रेग्नेंसी को हाई-रिस्क माना जाता है। ऐसे में जानें किन महिलाओं को प्रेग्नेंसी में एक्स्ट्रा मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ सकती है।

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण- India TV Hindi
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के लक्षण Image Source : MAGNIFIC

आजकल प्रेग्नेंसी के दौरान ‘हाई-रिस्क’ शब्द सुनकर कई महिलाएँ घबरा जाती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई बड़ी परेशानी आने वाली है। गोरखपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल में प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सौम्या, कहती हैं कि इसका सीधा सा मतलब यह होता है कि इस स्थिति में माँ या बच्चे की सेहत पर सामान्य से अधिक सावधानी और नियमित जाँच की ज़रूरत होती है, ताकि किसी भी दिक्कत का समय रहते पता लगाया जा सके और सही समय पर उचित इलाज या डिलीवरी की योजना बनाई जा सके।

प्रेग्नेंसी हाई रिस्क कब होती है?

उम्र या पहले से मौजूद कुछ स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या ऑटोइम्यून बीमारियाँ इसका कारण बन सकती हैं, लेकिन सिर्फ उम्र के आधार पर किसी प्रेग्नेंसी को खतरनाक नहीं माना जाता है।

ट्विन्स प्रेग्नेंसी में भी जरूरी है ज्यादा मॉनिटरिंग

ट्विन्स या इससे ज्यादा बेबी की प्रेग्नेंसी में मां और बेबी दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसी प्रेग्नेंसी में बेबी की ग्रोथ, प्लेसेंटा, ब्लड फ्लो और मां के ब्लड प्रेशर समेत कई चीजों पर नियमित नजर रखी जाती है। इसी वजह से मल्टीपल प्रेग्नेंसी में आमतौर पर ज्यादा मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। कई बार शुरुआत में महिला पूरी तरह स्वस्थ होती है, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या प्री-एक्लेम्पसिया जैसी समस्या सामने आ जाती है।

कैसे होती है एक्स्ट्रा मॉनिटरिंग?

हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी में जांच की संख्या और समय महिला की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है। इसमें नियमित ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच, ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और जरूरत पड़ने पर बेबी की हार्टबीट तथा ग्रोथ की मॉनिटरिंग शामिल हो सकती है।

हाई-रिस्क सुनकर घबराएं नहीं

हाई-रिस्क शब्द को डर की तरह लेने के बजाय इसे ज्यादा सावधानी के संकेत के रूप में समझना चाहिए। समय पर प्रेग्नेंसी की जांच, डॉक्टर की सलाह का पालन, दवाओं को बिना सलाह बंद न करना और ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर जैसी समस्याओं को नियंत्रित रखना जरूरी है। किसी भी असामान्य लक्षण, जैसे तेज सिरदर्द, धुंधला दिखना, अचानक ज्यादा सूजन, ब्लीडिंग, पेट में तेज दर्द या बेबी की मूवमेंट कम महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर पहचान और नियमित मॉनिटरिंग से कई जटिलताओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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