चौराहे पर लगे प्रॉपर्टी डेवलपर्स के लगे बड़े बड़े होर्डिंग, फोन पर फ्लैट बुकिंग के साथ मिलने वाले शानदार ऑफर और अखबारों में छपने वाले लंबे चौड़े इस्तेहार देखकर अगर आप भी प्रॉपर्टी बुक करने का मन बना रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। प्रॉपर्टी बुकिंग से जुड़ी तमाम बारीकियों को नजरअंदाज कर ग्राहक अक्सर ग्राहक ऐसी मुश्किलों में फंस जाता है, जिसके चलते बाद में उसे पछतावा होता है। मसलन, पजेशन के टाइम पर पता चलने वाले हिडन चार्जेज, ब्रॉशर में दिखाए गए फ्लैट और असल में तैयार होने वाले फ्लैट में अंतर आदि। ग्राहकों की यह मुश्किल को आसान करने के लिए हमने प्रॉपर्टी कंसल्टिंग फर्म फिनलेस के निदेशक पवन जसूजा से बात करके 10 प्वाइंट वाली एक चेकलिस्ट तैयार की है। जसूजा का मानना है कि प्रॉपर्टी बुक करने से पहले अगर ग्राहक इस चेकलिस्ट में लिखे गए बिंदुओं के जवाब खोज लेता है तो गलती की गुंजाइश काफी कम रह जाती है।
ये है 10 बिंदुओं वाली चेकलिस्ट
1- जमीन की रजिस्ट्री देखें
डेवलपर या बिल्डर से उस जमीन की रजिस्ट्री दिखाने की मांग करें जिसपर वह बिल्डिंग बना रहा है। यह साफ कर लें कि इस जमीन पर किसी तरह का कोई भी विवाद तो नहीं चल रहा है। हाल के वर्षों
में देखा गया है कि जमीन को लेकर उठे मुद्दों के चलते तमाम बिल्डर्स के प्रोजेक्ट अटक गए। जिसका खामियाजा अंत में ग्राहकों को भी भुगतना पड़ा है। यहां ग्राहकों के पास बैंकों से लोन लेने कर जमीन की हकीकत पता करने का एक
विकल्प होता है। बैंक केवल उन्ही जमीनों पर लोन देता है जिसपर किसी तरह का कोई विवाद न हो। ऐसे में किसी प्रोजेक्ट के लिए बैंक से लोन का आवेदन ग्राहकों की समस्या का समाधान हो सकता है।
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