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खुलासा: संसद हमले के बाद अटल सरकार ने करवाई थी सर्जिकल स्ट्राइक!

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 28, 2017 11:16 am IST,  Updated : Jan 28, 2017 11:16 am IST

नई दिल्ली: दिसम्बर 2001 में संसद पर हुये आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश व्याप्त था। आतंकियों को माकूल जवाब देने की आवाज हर ओर उठ रही थी तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी

IAF Surgical Strike- India TV Hindi
IAF Surgical Strike

नई दिल्ली: दिसम्बर 2001 में संसद पर हुये आतंकी हमले के बाद पूरे देश में आक्रोश व्याप्त था। आतंकियों को माकूल जवाब देने की आवाज हर ओर उठ रही थी तब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक करवाया था। इस ऑपरेशन की जानकारी किसी को नहीं थी। हफिंगटन पोस्ट वेबसाइट ने अपनी एक्सक्लूसिव खबर में इस बात का खुलासा किया। पोस्ट के मुताबिक 2 अगस्त 2002 को 2 बजे सुबह भारतीय वायुसेना के विमानों ने एलाओसी पर पाकिस्तानी बंकरों पर सर्जिकल स्ट्राकक को अंजाम दिया था। यह हमला लेजर डेस्टिनेशन यंत्रों के जरिये किया गया था।

हफिंगटन पोस्ट के मुताबिक, 31 जुलाई 2002 को 2 बजे सुबह का वक्त था, 29 साल के फाइटर पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट राजीव मिश्रा को अंबाला एयरफोर्स स्टेशन स्थित उनके क्वार्टर से उठाया गया। मिश्रा एयरफोर्स के जगुआर फाइटर जेट विमान को उड़ाया करते थे लेकिन उस रात उन्हें विमान उड़ाने के लिए नहीं जगाया गया था। उस दौरान भारतीय वायुसेना को इजराइल से लेजर गाइडेंस सिस्टम मिला था और मिश्रा इस टैकनोलोजी से वाकिफ थे।

 
मिश्रा पहले भारतीय थे जिन्हें इस तकनीक का इस्तेमाल करने का मौका मिल रहा था। उडऩे से पहले मिश्रा और उनके 2 साथियों को एयरफोर्स स्ट्राइक सेल ने विमान के अंदर बताया था कि उन्हें पाकिस्तान में घुसकर एलओसी के पार कई खास जगहों पर इस तकनीक का इस्तेमाल करना है। इससे पहले एयरफोर्स ने कभी इस तरह का अभियान नहीं किया था।

ये वो मौका था जब दिसंबर 2001 में आतंकियों ने भारतीय संसद पर सात महीने पहले ही हमला किया था। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल था। उस दौरान दोनों देशों की सेनाएं सीमा के दोनों ओर तैनात कर दी गई थी। भारत ने इसे ऑपरेशन पराक्रम का नाम दिया था।
 
उस दौरान अटल बिहार वाजपेयी प्रधानमंत्री थे और जॉर्ज फर्नांडीज रक्षा मंत्री थे। 2002 में मई जून के बीच दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। उस दौरान कारगिल युद्ध जैसे हालात भी बन रहे थे। पहले ये रणनीति बनाई गई कि भारतीय सेना पाकिस्तान के ठिकानों पर हमला करेगी। पर अचानक सेनाध्यक्ष सुंदराजन पद्मनाभन से बातचीत के बाद इसको बदला गया। ये तय हुआ कि बगैर शोरशराबे के सीमा पार ठिकानों पर सर्जिकल हमले होंगे.
 
पूर्व सेनाध्यक्ष सुंदराजन पद्मनाभन ने हफिंगशन पोस्ट से बात करते हुए बताया कि इस बारे में ज्यादा कुछ बताना ठीक नहीं होगा। इसका मकसद पाकिस्तान के आतंकी बेस को नष्ट करना था। लेकिन इस ऑपरेशन के बारे में सिर्फ चंद राजनेता और ऑपरेशन का हिस्सा रहे लोग ही जानते हैं।

फ्लाइट लेफ्टेनेंट मिश्रा और उनके दो साथियों को ये काम सौंपा गया था कि वे कुपवाडा सेक्टर के केल इलाके में एलओसी पार कर कुछ जगहों पर लाइटिंग अप का काम करे। ये काफी खतरनाक काम था क्योंकि दोनों तरफ जबरदस्त गोलाबारी हो रही थी। फिर भी वायुसेना के इस तीनों जांबाजों ने अपने काम को अंजाम दिया, लेकिन उसी समय खबर आई कि खराब मौसम के कारण बमवर्शक विमान टेक-ऑफ नहीं कर पाए। आखिरकर 2 अगस्त 2002 को वायुसेना के मिराज विमानों ने लेसर गाइडेड टेकनोलोजी की मदद से पाकिस्तानी बंकरों को एलओसी के उस पर नष्ट कर दिया।

इस पूरी सर्जिकल स्ट्राइक को गुप्त रखा गया था।

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