नई दिल्ली: दिल्ली के अपोलो अस्पताल से जुड़े अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट के सिलसिले में दिल्ली पुलिस ने कम से कम तीन प्राप्तकर्ताओं और पांच दानकर्ताओं का पता लगाने का दावा किया है। इस बीच, जांच अधिकारियों ने इन दानकर्ताओं और प्राप्तकर्ताओं पर लगाए जाने वाली आपराधिक धाराओं के बाबत कानूनी राय मांगी है। इस कथित किडनी रैकेट के प्रकाश में आने के बाद दिल्ली सरकार ने अंगों का प्रतिरोपण करने वाले सभी अस्पतालों से मानव अंग एवं उत्तक अधिनियम का पालन करने को कहा है।
किडनी रैकेट के सरगना की खोज में आज कोलकाता और चेन्नई में छापे
इस बीच दिल्ली पुलिस ने किडनी रैकेट के सरगना की खोज में आज कोलकाता और चेन्नई में छापे मारे। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अपोलो अस्पताल में एक किडनी रोग विशेषज्ञ के दो निजी सचिवों सहित पांच लोगों को किडनी रैकेट के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। माना जा रहा है कि इस रैकेट के तार श्रीलंका और इंडोनेशिया सहित कई देशों तक जुड़े हैं। शनिवार दोपहर तक तीन प्राप्तकर्ताओं का पता कोल्हापुर, जम्मू-कश्मीर और गाजियाबाद में चला।
किडनी के लिए लिए जाते थे 40 लाख लेकिन डोनर को 10 फीसदी रकम ही देते थे
अधिकारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया हर प्रतिरोपण के लिए प्राप्तकर्ताओं से 40 लाख रूपए से ज्यादा वसूले गए जबकि इसमें से 10 फीसदी रकम भी दानकर्ता तक नहीं पहुंच सकी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने पांच से ज्यादा दानकर्ताओं का पता लगाया है जिसमें तीन महिलाएं शामिल हैं। इनमें से कुछ दानकर्ता अभी यहां के एक अस्पताल में भर्ती हैं।
फर्जी दस्तावेज बनाकर रिश्ता साबित किया जाता था
जांच के दौरान ये बात सामने आई कि गिरोह के सदस्य दानकर्ता और प्राप्तकर्ता के बीच रिश्ता साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे ताकि लगे कि वे कानून का पालन कर रहे हैं।
अपोलो अस्पताल में पांच मामलों का पता चला
अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने अपोलो अस्पताल में पांच मामलों का पता लगाया है जिसमें दानकर्ताओं को प्राप्तकर्ताओं की पत्नी, भाई, पिता या देवर (दो मामले) के तौर पर दिखाया गया है। अस्पताल में दानकर्ताओं के रहने की औसत अवधि छह दिन थी जबकि प्राप्तकर्ताओं के रहने की औसत अवधि 12 दिन थी । इस बीच, पुलिस ने कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत दानकर्ताओं और प्राप्तकर्ताओं पर आपराधिक धाराएं लगाने को लेकर कानूनी राय मांगी है । इस बाबत वकीलों से संपर्क साधा गया है।
अपोलो का स्टाफ भी किडनी रैकेड में शामिल
इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आदित्य सिंह और शैलेश सक्सेना शामिल हैं। आदित्य और शैलेश पिछले तीन-चार साल से अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों के निजी सचिव के तौर पर काम करते थे और तीन दलालों की पहचान असीम सिकदर, सत्य प्रकाश और देवाशीष मौलिक के तौर पर हुई है।
किडनी रैकेट : सच जानने के लिए 25 सदस्यों वाली टीम का हुआ गठन,छापे जारी
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने किडनी रैकेट के सरगना और अन्य की तलाश में कोलकाता और चेन्नई में छापेमारी की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस सिलसिले में गिरफ्तार पांच लोगों में से तीन को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है जबकि दो को आज एक अदालत में पेश किया गया जिसने उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पूरे गिरोह की गुत्थी सुलझाने के लिए 25 सदस्यों वाली एक विशेष जांच टीम बना दी गई है। टीम अन्य सदस्यों और रैकेट के सरगना राजू कुमार राव की तलाश कर रही है, इसके लिए कोलकाता और चेन्नई में आज छापेमारी की गई।
इस बीच, दिल्ली के दो और प्रमुख निजी अस्पताल और अपोलो अस्पताल के कुछ कर्मी पुलिस की जांच के घेरे में आए हैं। माना जा रहा है कि यहां के अन्य दो अस्पतालों में भी रैकेट के काम करने का तरीका एक जैसा था। मामले की जांच की जा रही है।
अभी तक किसी को क्लिन चीट नहीं
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अपोलो अस्पताल के किसी कर्मी को अब तक कोई क्लीन चिट नहीं दी गई है और इसमें कुछ बड़े डॉक्टर भी शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों से पूछताछ से पता चला है कि यह रैकेट पिछले साल कोयंबतूर में कम से कम 10 किडनी प्रतिरोपण में शामिल रहा है। समझा जाता है कि यह रैकेट दिल्ली के अलावा पंजाब और तमिलनाडु में भी सक्रिय है।
किडनी रैकेट के प्रमुख सरगना राजू कुमार तक पहुंचना चाहती है पुलिस
दूसरी ओर, पुलिस रैकेट में पैसों के लेन-देन की कड़ी तलाश रही है जिसके जरिए इसके सरगना राजू कुमार राव तक पहुंचा जा सके। राजू को पिछली बार त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में देखा गया था। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि आरोपी असीम सिकदर के दो बैंक खातों से उन्हें काफी अहम सुराग मिले हैं जिससे राव तक पहुंचा जा सकता है। इस बीच, दिल्ली सरकार ने अंग प्रतिरोपण कराने वाले सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे मानव अंग एवं उत्तक प्रतिरोपण कानून का सख्ती से पालन करें।
मानव अंग एवं उत्तक प्रतिरोपण कानून सभी अस्पतालों पर होता है लागू
स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल अधीक्षक (नर्सिंग होम) ए के सैनी की ओर से जारी परामर्श में कहा गया, दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य विभाग अपने इस निर्देश को दोहराता है कि अंग प्रतिरोपण कराने वाले दिल्ली के सभी अस्पतालों को मानव अंग एवं उत्तक प्रतिरोपण कानून का सख्ती से पालन करना है और नियमों को अक्षरश: मानना है।