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अकड़ में ममता, 'आईसीयू' में बंगाल, 600 से ज्यादा डॉक्टरों का इस्तीफा; दीदी ने नहीं उठाया राज्यपाल का कॉल

इन सबके बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी ममता सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि डॉक्टरों से गतिरोध खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अब तक ममता सरकार ने क्या किया है।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Published on: June 15, 2019 11:00 IST
अकड़ में ममता, 'आईसीयू' में बंगाल; 600 से ज्यादा डॉक्टरों का इस्तीफा- India TV Hindi
अकड़ में ममता, 'आईसीयू' में बंगाल; 600 से ज्यादा डॉक्टरों का इस्तीफा

नई दिल्ली: बंगाल में पिछले चार दिनों से चल रहा डॉक्टरों का आंदोलन आज पांचवे दिन भी जारी है और अब प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डॉक्टरों के बीच की ये तकरार भी बढ़ती ही जा रही है। दो डॉक्टरों की पिटाई से नाराज़ हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों ने दीदी की मीटिंग के ऑफर को भी ठुकरा दिया है। साथ ही डॉक्टर इस बात पर अड़ गए हैं कि जब तक ममता बिना शर्त माफी नहीं मांगती और दोषियों पर एक्शन का भरोसा नहीं देतीं तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हालांकि इस पूरे मामले पर ममता बनर्जी का रवैया भी हैरान करने वाला है।

डॉक्टरों के गुस्से का आलम ये है कि उन्होंने ममता के बातचीत के ऑफर को भी ठुकरा दिया है। ममता ने एनआरएस अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों को मिलने बुलाया था लेकिन उन्होंने मीटिंग से मना कर दिया है। डॉक्टरों के मुताबिक़ हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक ममता बिना शर्त माफी नहीं मांग लेतीं। उन्होंने हड़ताल ख़त्म करने के लिए सरकार के सामने 6 शर्तें भी रख दी हैं।

अब बंगाल में ममता के खिलाफ मुखालफत बढ़ती जा रही है। पिछले 8 साल में पहली बार ममता का पुतला तक जलाया गया है। सड़कों पर मार्च निकाले जा रहे हैं। डॉक्टरों के साथ बंगाल का एक बड़ा वर्ग खड़ा हो गया है। इतना सब कुछ हो रहा है बंगाल में लेकिन दीदी की अकड़ कम नहीं हो रही।

बंगाल में बिगड़े हालातों पर बातचीत के लिए राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी ने खुद ममता को फोन किया लेकिन ममता ने ना फोन उठाया और ना ही कोई जवाब दिया। गवर्नर ऑफिस से मुख्यमंत्री दफ्तर संदेश तक पहुंचाया गया कि राज्यपाल मिलना चाहते हैं लेकिन अब भी ममता की ओर से कोई रिस्पॉन्स नहीं है। 

स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने भी कई बार फोन करके ममता से बात करने की कोशिश की लेकिन ममता ने बात नहीं की। इसके बाद केंद्र सरकार को ममता को चिट्ठी लिखकर अपील करनी पड़ी कि वो खुद पहल कर हड़ताल को खत्म करवाने की कोशिश करें।

इन सबके बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी ममता सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि डॉक्टरों से गतिरोध खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए अब तक ममता सरकार ने क्या किया है। इसका जवाब सात दिनों में सरकार को देना है लेकिन ऐसे हालातों में भी ममता अलग ही राग अलाप रही हैं। 

जिस वक्त उनकी पहली और आखिरी प्राथमिकता बंगाल में हालात संभालने की होनी चाहिए थी, उस वक्त वो कह रही हैं कि बंगाल में रहना है तो बांग्ला बोलना ज़रूरी है। हैरानी की बात है कि बंगाल में अब तक 600 से ज्यादा डॉक्टर्स इस्तीफा दे चुके हैं। बड़े शहरों में सरकारी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स हड़ताल पर है, प्रदर्शन हो रहे हैं लेकिन ममता बिगड़े हालात संभालने में अब तक नाकाम है और आगे भी यही तस्वीर रही तो हालात और बदतर होने वाले हैं।

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