नई दिल्ली: हाल ही में जदयू के एक नेता के पुत्र के हाथों एक युवक की हत्या समेत अपराध की घटनाओं की श्रृंखला का हवाला देते हुए भाजपा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नैतिक आधार पर इस्तीफा मांगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से उत्तर प्रदेश में जदयू प्रमुख द्वारा अपनी पार्टी का अभियान शुरू किए जाने के दिन ही भाजपा ने उन पर पलटवार किया और शराबबंदी पर उनके दावों का मखौल उड़ाते हुए कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन सत्ता के नशे में है।
भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव ने जदयू की एक विधान पार्षद के बेटे रॉकी यादव के हाथों एक युवक की कथित हत्या का जिक्र करते हुए कहा, कुमार अपनी पार्टी विधायकों पर काबू पाने में असमर्थ हैं, तो वह कैसे राज्य में कानून व्यवस्था संभाल पाएंगे। लिहाजा उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। भूपेंद्र यादव ने जदयू और उसके सहयोगी राजद के नेताओं की कथित संलिप्तता वाले अपराध की कई घटनाओं का उल्लेख किया जिनमें बलात्कार एवं हत्या भी शामिल हैं।
बिहार के पार्टी मामलों के प्रभारी ने कहा, जो मद्यनिषेध की बात कर रहे हैं, वे सत्ता के नशे में चूर हैं। भाजपा नेता ने बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी निशाना बनाया और कहा कि उन्हें बचकाना बयानों से दूर रहना चाहिए। तेजस्वी यादव ने जंगल राज के आरोप पर भाजपा पर पलटवार किया था।
भाजपा के सचिव श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस पर प्रहार करते हुए कहा कि उसके उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पास (बिहार में) युवक की हत्या के बारे में कहने के लिए एक भी शब्द नहीं हैं जबकि वह भाजपा शासित राज्य में जहां कहीं भी ऐसी घटना हो जाए, वहां जाने का कोई मौका नहीं चूकते। नीतीश कुमार की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा पर भूपेंद्र यादव ने कहा कि पहले उन्हें बिहार को संभालना चाहिए।
हत्या के मामलों में वृद्धि से पुलिस के अधिकारी भी सकते में हैं। आंक़डों के अनुसार इस वर्ष के पहले महीने यानी जनवरी में हत्या के कुल 227 मामले सामने आए थे, जबकि जुलाई में यह संख्या बढ़कर 317 तक जा पहुंची। इस वर्ष पहले सात महीने के दौरान राज्य में 2,182 लोगों की हत्या की गई है।
ऐसे में अब विपक्ष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के "अमन चैन" और "सुशासन" वाले बहुप्रचारित दावे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न ख़डाकर सत्तारचित भ्रमजाल को तो़डने का प्रयास करने लगा है। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महासचिव और सांसद रामकृपाल यादव कहते हैं कि मुख्यमंत्री का अमन-चैन का दावा खोखला है।
वह जनता का भ्रमित कर रहे हैं, लेकिन अब अपराधिक घटनाओं में वृद्धि ने उनकी सरकार की पोल खोल दी है। वह कहते हैं कि आज राज्य में दुष्कर्म की घटनाओं में वृद्धि के कारण महिला संगठनों को राजधानी की सडकों पर आंदोलन के लिए उतरना पड रहा है।
यादव कहते हैं कि राज्य के अन्य जगहों की कौन कहे, राजधानी पटना में भी आपराधिक घटनाओं का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। कार्यवाही के नाम पर सिर्फ पुलिसकर्मियों के तबादले हो रहे हैं। वे आरोप लगाते हैं कि मुख्यमंत्री की यात्रा होती है, लेकिन इस यात्रा के दौरान पुलिस का तामझाम किसी राजसी सुरक्षा व्यवस्था से कम आलीशान नहीं होता।
वह कहते हैं कि वास्तविकता यही है कि जनता अपराधों से त्रस्त है। उन्होंने सरकारी आंक़डे का हवाला देते हुए कहा कि राजधानी पटना में पिछले सात महीने में किसी भी जिले से ज्यादा 8,788 अपराध के मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई मामले तो यहां पुलिस दर्ज ही नहीं करते।