
गरीब व्यक्ति को गोष्ठी में जाना विष के समान-
आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में कहा है कि कभी भी गरीब व्यक्ति को सभा गोष्ठी में नही जाना चाहिए क्योकि सभा में सभी लोग अच्छें वस्त्र पहनें होगें। अच्छे और धनी लोगों के बीच यदि कोई गरीब व्यक्ति चले जाएगा तो उसे अपमान का अहसास होता है। जो एक विष के समान है।