पुणे: पुणे की एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने और फिर उसकी हत्या करने के मामले में मंगलवार को तीन प्रमुख आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई है। एक त्वरित अदालत ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर नयना पाठक-पुजारी के साथ अक्टूबर, 2009 में सामूहिक दुष्कर्म करने और उसके बाद उनकी हत्या करने वाले तीनों अपराधियों को मौत की सजा सुनाई है।
विशेष न्यायाधीश एल. एल. येनकर ने सोमवार को दिनभर चले दोनों पक्षों के वकीलों की जिरह के बाद योगेश अशोक राउत, महेश बालासाहेब ठाकुर और विश्वास हिंदूराव कदम को अपहरण, लूट, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था। 32 वर्षीय राउत और 31 वर्षीय ठाकुर पुणे के ही रहने वाले हैं, जबकि तीसरा अपराधी 34 वर्षीय कदम सतारा का रहने वाला है।
विशेष सरकारी वकील हर्षद निंबालकर ने हादसे को 'दुर्लभतम' करार दिया था और पीड़िता के साथ की गई बर्बरता का हवाला देते हुए दोषियों को मृत्युंदड देने की जोरदार मांग की थी। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष पूरे घटनाक्रम को साबित करने में सफल रहा है, और जिस तरह इस गंभीर अपराध को अंजाम दिया गया, उसके अनुसार दोषी कानून के तहत अधिकतम सजा पाने के लायक हैं। आरोपियों का दोष तय होने के बाद उन्होंने कहा, "पीड़िता के साथ जिस बर्बर तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया गया और उसके बाद उसकी हत्या की गई, यह एक दुर्लभतम मामला बनता है।"
मामले में गिरफ्तार एक सह-आरोपी राजेश पांडुरंग चौधरी को सरकारी गवाह बनने के चलते माफी दे दी गई है। हालांकि बचाव पक्ष के वकील बी. ए. अलूर, रंजीत ढोमसे पाटील और अंकुश जाधव ने पांडुरंग को हल्की सजा देने की मांग करते हुए अदालत से कहा कि पांडुरंग भी अपराध में सहभागी रहा है, इसलिए उसे भी सजा मिलनी चाहिए।
सात अक्टूबर, 2009 को देर शाम 8.0 बजे खराडी स्थित सिनक्रोन आईटी कंपनी में अपनी ड्यूटी पूरी कर नयना घर लौटने के लिए बस का इंतजार कर रही थीं, तभी उन्हीं की कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करने वाले राउत ने उन्हें अपनी कार से घर छोड़ने के लिए कहा। लेकिन राउत ने नयना की घर की तरफ जाने के बजाय कार राजगुरुनगर की ओर मोड़ दी और रास्ते में दो मित्रों को भी कार में बिठा लिया।
तीनों ने चलती कार में नयना के साथ दुष्कर्म किया और एक सुनसान इलाके में कार खड़ी कर नयना का डेबिट कार्ड छीन लिया और चाकू की नोक पर नयना से डेबिट कार्ड का पिन कोड भी उगलवा लिया और बाद में नयना के बैंक खाते से डेबिट कार्ड के जरिए 61,000 रुपये निकाल लिए।
तीनों ने नयना के स्कार्फ से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी और उनका चेहरा पत्थर से कूच डाला, ताकि उसकी पहचान न हो सके। उन्होंने इसके बाद नयना का शव जारेवाड़ी के जंगलों में जमीन में गाड़ दिया, जहां से दो दिन बाद नयना का शव मिला।