नयी दिल्ली: 500 और 1000 रपये के पुराने नोटों को बंद करने का फैसला जाली भारतीय मुद्रा नोट (FICN) को चलन से बाहर करने में मदद करेगा। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इसका मूल्य तकरीबन 400 करोड़ रपये है।कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकीय संस्थान (ISI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा कराए गए अध्ययन का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि प्रचलन में जो जाली मुद्रा है उसका मूल्य तकरीबन 400 करोड़ रपये है, जो पिछले चार वर्षों से स्थिर है।
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अध्ययन के मुताबिक 70 हजार करोड़ रुपये मूल्य की जाली मुद्रा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और भारत के बाहर से संचालित अंडरवर्ल्ड गिरोह ने भारतीय अर्थव्यवस्था में लगा दिए। इसमें से सिर्फ एक तिहाई रकम का एजेंसियां पता लगा सकी हैं। उन्होंने कहा कि शेष रकम का पता तब लगेगा जब उन्हें बैंकों में जमा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि औसतन यह राशि 400 करोड़ रुपये है।
अब नए कदम के बाद विशेषज्ञ महसूस करते हैं कि 500 और 1000 रुपये की जाली मुद्रा या तो गिरोह के लोग नष्ट कर देंगे या बैंकों में जमा करने के दौरान उनकी पहचान की जाएगी। तकरीबन 80 फीसदी FICN भारत में बांग्लादेश के रास्ते पहुंचती है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अपने ढाका के समकक्षों के साथ उस देश और खासतौर पर हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर गिरोहों की गतिविधियों पर कार्रवाई करने के लिए काम कर रही है।